इच्छाशक्ति के बिना आप कुछ नहीं कर सकते

धीरज सिंह
परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी का कहना है कि जब तक आपकी इच्छा नहीं होगी आप कुछ नहीं पा सकते। इसलिए सहजयोग में शुद्ध इच्छा शक्ति का होना जरूरी है। इच्छा शक्ति का अर्थ इच्छा नहीं होता। इच्छा शक्ति का अर्थ होता है इच्छा को कार्य में लगाना। अतः आप इच्छा करें तथा इसके बाद कर्म में लगाएं। आप यह कर सकते हैं। सबसे पहले आपको जानना होगा कि हमारे अंदर इच्छा है या नही। इसमें कोई शंका नहीं है कि वह है। वह प्रकाश दाता है तथा यह आपकी इच्छा शक्ति के माध्यम से ही कार्यान्वित होगा। इसलिए हमारी इच्छा शक्ति को कितना शक्तिशाली होना चाहिए। हमें अपनी इच्छा शक्ति के प्रति कितना समर्पित होना चाहिए, यह व्यक्ति को जान लेना चाहिए।
इच्छा शक्ति को आपको अपने भीतर पूर्ण रूप से समाहित कर लेना चाहिए।

एक बार आप सहजयोग को करना शुरू कर देंगे तो आप मान लेंगे की सहजयोग कितना महत्वपूर्ण है जो परमात्मा तथा दैवी शक्ति की नजरों में पूरी सृष्टि को एक वास्तविक अर्थ प्रदान करता है। हमें अपने अंदर देखने की कोशिश करनी चाहिए कि हम क्या हम मूल बातों को समझते हैं? क्या हमारे अंदर वो गुण हैं जिनके द्वारा हम उन मूल बातों को बनाए रख सकते हैं? सहजयोग की पहली मूल बात है कि आपको अपनी आत्मा बनना होगा, ताकि आपका शरीर केवल आत्मा की शक्ति प्रसारित करे। यह सहजयोग की मूल बात है। अब आप अपनी इच्छा शक्ति के साथ क्या करते हैं। सबसे पहले आप इच्छा करें, फिर आप कार्य करें। मैं कहां जा रहा हूं? मैं क्या कर रहा हूं? मैं एक सत्य साधक हूं। एक सत्य साधक होने के नाते क्या यह काम मुझे करना चाहिए? इससे तुरंत संतुलन आ जायेगा। इस संतुलन को आना होगा। सबसे प्रमुख चीज है स्वयं को संतुलित करना।