फर्नीचर बाजार में फिर जल जमाव, पिछले साल के भयानक हालात याद आए

नाले में अब भी भरा कचरा
आनंद शुक्ला

उल्हासनगर. इस साल हुई बारिश ने ही पिछले साल हुए जलजमाव की याद दिला दी। फर्नीचर बाजार वाले अब तक नहीं भूले हैं पिछले साल का वो जलजमाव का दिन। गौरतलब है कि नाले में अब भी भरा कचरा भरा है और फिर लोग डरे हुए हैं। जब तक नालों पर अवैध निर्माण बनते रहेंगे, जबतक इमारतवासी, दुकानदार और कारखानदार अपना कचरा, नालों में डालते रहेंगे, तब तक ये नाले भरते रहेंगे, जलजमाव होता रहेगा और लोग मनपाकर्मियों को कोसते रहेंगे।
उल्हासनगर कैम्प 2, नेहरू चौक, फर्नीचर बाज़ार, देना बैंक के सामने नाला सफाई नहीं होने के कारण, भारी बारिश के कारण नालों में कचरा जमा होने की वजह से जलजमाव हुआ है।

गीता कॉम्प्लेक्स इमारत जो नाले पर बनाई गई थी, उस इमारत के बगल से जो नाला है वो चौहान फर्नीचर के नाले पर ही बनी इमारत तक 500 फ़ीट की दूरी वाला बड़ा नाला हुआ करता था। 1995 तक वह बड़ा नाला था। उस उक्त नाले को पाट कर उस पर रोड बना दिया गया।जिसे लोग लिंक रोड कहते है।
नाला जो अभी रोड है उसके इर्द गिर्द इमारतों में सैंकड़ों गारमेंट के कारखाने से निकला कपड़ा, चिन्दी डाला जाता है। फर्नीचर बाजार होने के कारण सैंकड़ो की तादाद में फर्नीचर के कारखानों से निकला प्लाइवूड, लकड़ी के टुकड़े और तो और खिड़की दरवाज़े आदि समान भी नाले में डाला जाता रहा है।
उक्त नाले पर 500 फ़ीट तक कोई भी चेम्बर बना ना होने के कारण भी जलजमाव की त्रासदी झेलनी पड़ी थी, उसके बाद करीबन 4 महीनो तक ये रोड बन्द रहा रोड के अंदर 4 ड्रेनेज चेम्बर बनाये गये, ताकि अंदर उतर कर हर बार स्वच्छ्ता की जाये।
पिछले साल 3 जून 2020 के दिन निसर्ग तूफ़ान के कारण आई बरसात ने सारे दावों की पोल खोल दी थी। इस साल फिर वहीं जलजमाव हुआ। ड्रेनेज भरा, उमनपा को खबर लगते ही जेसीबी भेजा गया, सफाई कर्मचारियों द्वारा नाला स्वच्छ किया गया और ठीक एक साल बाद फिर से नाले से लगे फर्नीचर के दुकानदारों को दुकानों में भरे 2 फ़ीट तक के पानी को बाहर निकालना पड़ा।
इस साल जून की शुरुआत में भी वैसे ही हालात हो गए। ​फिर जलजमाव हुआ और लोग चिंतित हो गए। मनपा कान में रूई ठूंस कर बैठी है।