ये हैं सच्‍चे हीरो, पर्यावरण को कर रहे हैं बहाल

अरुण लाल
Mumbai.
आज पर्यावरण द‍िवस (Environment Day) पर देश भर में लोगों ने पेड़ लगाए यह बहुत अच्‍छी बात है, पर आज हम आपको म‍िला रहे हैं एक ऐसी टीम से जो रोज पर्यावरण द‍िवस मनाते हैं। मुंबई के नेशनल पार्क मुंलुड के योगी ह‍िल में प‍िछले पांच वर्षों से काम करने वाली इस टीम ने जंगल का नक्‍शा ही बदल कर रख द‍िया है। इस टीम ने 20 हेक्टेयर वन भूमि में 36 प्रजात‍ियों के लगभग तीन हजार पेड़ लगाए हैं। इस टीम ने वन व‍िभाग की मदद से पहाड़ पर म‍िट्टी के क्षरण को रोकने के ल‍िए 150 से ज्‍यादा छोटे-छोटे बांध बनाए हैं। ये बीज से पौधे तैयार करते हैं। पहाड़ पर पौधे लगाते हैं, और उनके मजबूत हो जाने तक उन्‍हें खाद पानी देते हैं। फारेस्‍ट रेस्‍टॉरेश एंड कंजरवेशन ग्रुप अरव‍िंद परमार, व‍िनायक देशमुख, शेखर ठाकुर और हेमंत श्रृंगी के नेतृत्‍व में चलता है। इसके अलावा सैकड़ों लोग रोज थोड़ा-थोड़ा योगदान इस यज्ञ में कर रहे हैं।

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हमारे लिए हर दिन पर्यावरण दिवस है
अरव‍िंद परमार कहते हैं क‍ि हमारे ल‍िए रोज पर्यावरण द‍िवस है। अपने हंसमुख अंदाज में वे रोज पर्वत पर आने वाले लोगों को पौधों को पानी डालने, उनकी सेवा करने की प्रेरणा देते हैं। वे कहते हैं क‍ि आप ज‍िम जा पैसे देकर मोटापा कम करने का प्रयास करते हो, यहां पौधों की सेवा करो मोटापा भी कम होगा, और अपने बच्‍चों के ल‍िए अच्‍छी हवा का इंतजाम भी कर सकोगे।

जंगल के समाप्त पेड़ों को बचाने की कवायद
व‍िनायक श्रृंगी बताते हैं क‍ि 1973 में ग्लिरिसिडिया के बीज आए। 1986 में मुंबई नेशनल पार्क में लगाए गए। इसका उद्देश्य था क‍ि लोग जंगल में इसकी लकड़ी ही ले जाएं और बाकी के पेड़ बच जाएं। पर इस पेड़ ने जंगल के बाकी के पेड़ों को भारी नुकसान पहुंचाया। यह पेड़ अपने आसपास क‍िसी पेड़ को पनपने नहीं देता। यह इतना अजीब पेड़ है क‍ि इस पर कभी कोई पक्षी अपना घोसला नहीं बनाता। इसकी लकड़ी भी क‍िसी काम की नहीं है। ऐसे में हम जंगल के समाप्‍त हुए पेड़ों को फ‍िर से बचाना चाहते हैं।

ग्रुप में 8 से 65 वर्ष के लोग
बता दें क‍ि इस ग्रुप में 12 वर्ष से लेकर 65 वर्ष के लोग जुडे हुए हैं। कोई डॉक्‍टर है,कोई दुकान चलाता है, कोई व्‍यापारी है तो कोई छात्र। इस ग्रुप में सबसे छोटे सदस्‍य आदिरा सनिल 8 वर्ष के और यतिका सनिल 10 और कपीस पाट‍िल और ईशान्य श्रृंगी 13 वर्ष के हैं। सबसे बडी उम्र के 65 वर्ष के श‍िवाजी नार्लेकर हैं।

इसके अलावा डॉक्‍टर संदीप स‍िंह ट‍िकाले, महेश श्रीन‍िवासन और उनकी पत्‍नी कृत‍िका श्रीन‍िवासन, जयंत गोसर, न‍िमीष कक्‍कड़, मनमीन स‍िंह, मनदीप स‍िंह, सलमान खान, पूजा, सुदाम तावडे, क‍िशोर पंचाल, आकाश, साह‍िल, स‍िद्धेश, अतुल सांवत, सुनील शर्मा, रोज सुबह पर्वत पर पहुंचते हैं और दो से तीन घंटे पर्यावरण को देते हैं। यहां पर हंसी-मजाक के बीच काढ़ा और म‍िठाई और मठरी भी चलती रहती है। यहां पर कोई लीडर नहीं, यहां कोई बंधन नहीं, पर हर क‍िसी का जुड़ाव और कमिटमेंट गहरा और मजबूत है। इस टीम ने पूरे पर्वत की काया ही पलट कर रख दी है।