नाले का पानी उल्हास नदी में मिलकर पहुंच रहा घरों में

आनंद शुक्ला
उल्हासनगर.
नाले का पानी उल्हास नदी (Ulhas river) में मिलकर लोगों के घरों में पहुंच रहा है। ​कर्जत, नेरल, बदलापुर, खेमानी नाला, म्हारल, मोहने, एनआरसी नाला सहित अन्य सभी नालों का प्रदूषित पानी सीधे उल्हास नदी में आ रहा है, लेकिन इसका सुध लेने वाला कोई नही है।
उल्हास नदी की बदहाली के लिए जितना लिखा जाए उतना कम है, प्रशासन अब उल्हास नदी को भी वालधुनी नदी की तरह नाला बनाने पर उतारू दिख रहा है। कर्जत से लेकर नेरल, बदलापुर में भी और उल्हासनगर का खेमानी नाला म्हारल नाला मोहने एनआरसी नाला व अन्य सभी नालों का सीधा प्रदूषित पानी उल्हास नदी में जा रहा है,
खेमानी नाले का पानी आज बारिश में पम्पिंग स्टेशन बन्द होने के कारण कई बार ओवरफ्लो होकर उल्हास नदी में जा मिल ही रहा है। म्हारल नाला, मोहने एनआरसी कम्पनी से नाला उल्हास नदी में जा मिलता है।
सेंच्युरी का पंपिंग स्टेशन, एमआईडीसी उल्हासनगर का पंपिंग स्टेशन, कल्याण का पंपिंग स्टेशन, स्टेम प्राधिकरण का जल शुद्धिकरण केंद्र जहां से पानी फिल्टर करके उल्हासनगर मनपा, कल्याण डोम्बिवली मनपा, भिवंडी मनपा, ठाणे मनपा, मीरा भायंदर के करीबन 50 लाख नागरिक रोज की जरूरतें पूरी करने के लिये पीने के लिए, खाना बनाने के लिये इस्तेमाल करते हैं।
नाले से बहाया जानेवाला मलमूत्र सीवेज सीधे उल्हास नदी में छोड़े जाने से 50 लाख नागरिकों की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है। इसलिए लोगों का मानना है कि बारिश के मौसम में उबाल कर पानी पीना ठीक है।