भारत की चिकित्सा पद्धति है ‘आयुर्वेद, इस पर किसी एक व्यक्ति का एकाधिकारी नहीं

Mau. आयुर्वेद, एलोपैथ, होम्योपैथी, यूनानी पैथी से लेकर जितनी चिकित्सा पद्धतियां हैं, सभी बीमार इंसानों की सेवाओं के लिए है, जिसका ध्येय है मरीजों को ठीक करना। चिकित्सकों का कर्म ही है मानवता की सेवा करना (whose goal is to cure the patients)। इसिलिए भारत में चिकित्सकों को ‘देव’ की उपमा दी गई है। 

 उक्त बातें आईएमए के पूर्व अध्यक्ष व पूर्वांचल के प्रख्यात आर्थो फिजिशियन डॉ. गंगा सागर सिंह ने कही। वर्तमान में बाबा रामदेव के बयान से उपजे विवाद को लेकर उन्होंने आयुर्वेद व एलोपैथ के संबंध में कहा कि यह दोनों पैथी एक दूसरे के पूरक हैं। 
 बताया कि अपने पांच दशक से अधिक के चिकित्सकीय जीवन में एलोपैथिक, फिजीशियन व सर्जन को प्रिस्क्रिप्शन पर हिमालया कंपनी के आयुर्वेदिक दवाएं भी लिखते हुए देखा है। श्री सिंह ने कहाकि आयुर्वेद पर किसी एक व्यक्ति का एकाधिकार नहीं हो सकता, यह हमारी प्राचीन चिकित्सा विधा है। विधाओं को मूर्त रूप देने में लाखों लोगों का योगदान है। कोई भी पैथी जाति धर्म पर आधारित नहीं बल्कि सभी पैथीयां बिना भेदभाव पीड़ित मानवता के कष्टों को दूर करने का काम करती हैं।


 आईएमए में संगठन को ईसाई मिशनरी के प्रचार संस्था बताने के संबंध में कहा कि आईएमए एलोपैथिक डॉक्टरों का एक संगठन है। अन्य ट्रेड यूनियनों की तरह यह संस्था  भी अपने सदस्यों के हितों का ध्यान रखना इसका मूल कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में अधिकांश संस्थाएं व कानून अंग्रेजों के कार्यकाल से आज तक मूल रूप में चले आ रहे हैं। तो क्या सभी संस्थाओं को ईसाई मिशनरी के लिए काम करने का आरोप लगाया जाएगा। आईएमए एक गैर राजनीतिक व गैर धार्मिक एसोसिएशन है, इसका किसी भी धर्म विशेष से कोई लेना देना नहीं है। 
 उन्होंने आम जनता से अनुरोध करते हुए कहा कि लोग सच्चाई को समझते हुए आयुर्वेद व एलोपैथ के विवाद से दूर रहें। जिस भी चिकित्सा पद्धति में उन्हें आराम मिलता हो उस पैथी से इलाज कराकर स्वास्थ्य लाभ लें।