मनपा आयुक्त के अधिकार में ही बजट का शुरू है क्रियान्वयन

स्थायी समिति की बैठक में खुलासा
ठाणे.
स्थायी समिति द्वारा इस वर्ष के बजट की स्वीकृति के बावजूद मनपा आयुक्त के अधिकार में बजट का क्रियान्वयन शुरू हो गया है। स्थायी समिति की बैठक में यह खुलासा हुआ है कि धनराशि उसी के अनुसार खर्च की जा रही है।
मनपा में नगरसेवक हणमंत जगदाले ने सवाल उठाया कि स्थायी समिति की मंजूरी मिलने और आम सभा द्वारा प्रस्ताव पारित करने के बाद भी बजट को लागू क्यों नहीं किया गया। हालांकि जैसा कि महासभा ने अंतिम प्रस्ताव नहीं भेजा, प्रशासन ने जोर देकर कहा कि 100 (अ) के तहत आयुक्त के अधिकार के तहत बजट का क्रियान्वयन किया जा रहा है। पांच फरवरी को आयुक्त ने स्थायी समिति के समने बजट पेश किया था। इसके बाद स्थायी समिति ने बजट मंजूरी दे दी। इसके बाद नौ मार्च को बजट महासभा के लाया गया। ऐसे में सवाल यह उठता है कि यह प्रस्ताव आखिरकार कहां चला गया।
आयुक्त ने स्थायी समिति को 2020-21 के लिए 2,807 करोड़ रुपए और 2021-22 के लिए 2,755 करोड़ रुपए का संशोधित बजट पेश किया। स्थायी समिति के समक्ष बजट पेश करने के बाद सदस्यों ने 15 दिनों तक इस पर चर्चा की। साथ ही नौ मार्च को स्थायी समिति में बजट को मंजूरी दी गई। सभी विभागों से चर्चा के बाद 2020-21 के संशोधित बजट में 110.93 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी की गई। नतीजतन संशोधित बजट 2,997.96 करोड़ रुपए हो गया है और मूल बजट 491 करोड़ रुपए बढ़ाकर 3,246.31 करोड़ रुपए कर दिया गया है। शुक्रवार को हुई स्थायी समिति की बैठक में राकांपा के वरिष्ठ नगरसेवक हणमंत जगदाले के एक सवाल का प्रशासन ने चौंकाने वाला जवाब दिया। प्रशासन की ओर से कैफो सूर्यवंशी ने जवाब दिया कि अधिनियम 100 (अ) के तहत बजट का क्रियान्वयन वर्तमान में आयुक्त के अधिकार में है। कैफो के जवाब पर जगदाले ने प्रशासन की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अगर स्थायी समिति ने मंजूरी दे दी है, तो उस बजट का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने जोरदार तरीके से प्रशासन घेरा। अतिरिक्त आयुक्त संजय हेरवाड़े ने भी जोर देते हुए कहा कि कैफो ने उचित जवाब दे रहे हैं। उन्होंने स्थायी समिति सभापति संजय भोईर को आश्वासन दिया कि यदि प्रशासन की भूमिका उचित नहीं है, तो आखिरी में महापौर से परामर्श करते हुए समाधान निकाला जाएगा। वहीं सदस्यों ने कहा कि स्थायी समिति द्वारा प्रस्ताव को मंजूरी देने और इसे महासभा में भेजने के बाद आयुक्त के अधिकार समाप्त हो जाते हैं। इसलिए स्थायी समिति के अधिकार के तहत बजट को लागू करना आवश्यक है।