International Tea Day : वर्ल्‍ड टी डे : चलो चाय हो जाए…

कहते हैं जहां चाह है वहां चाय है… इस अनोखे पेय ने मानव जीवन को पुरी तरह से अपनी जकड़ में ले रखा है। हम खुश हों, दुखी हों, बीमार हों, स्‍वस्‍थ्‍य हों, जैसा भी महसूस कर रहे हों, यह हमारे जीवन में बनी रहती है। संसार में इसका कोई मुकाबला नहीं, हर कोई रोज कहता ही है चलो चाय हो जाए…

सुबह-सुबह अंगडा़ई लेकर जागने का मजा ही सौ गुना हो जाता है, जब सांसों मे कड़क चाय की महक आ रही हो। और उसके बाद उस कप थामकर घूंट दर घूंट सुड़क कर जीभ से गले तक की यात्रा करने वाली चाय आत्मा तक को जाग्रत करके अंग -अंग को प्रफुल्लित कर देती है।

बारिश हो रही हो तो चाय, काम करते-करते थक गए, तो चाय, उदासी में चाय, खुशी में चाय यानि हर स्वागत को सार्थक करती चाय बस एक बहाना ही तो चाहती है, नई दोस्ती की शुरुआत या फिर दोस्ती टूटने का अवसाद दूर भगाना हो, किसी से गपशप का मन हो कुछ भी हो बस दरकार होती है, एक प्याली चाय की। उबलते हुए पानी में वो खुशबू और रंग छोड़ जाती हैं चाय की पत्तियां, मानो कह रही हों, हमने सूरज और हवा से सोखा है कोई जादू, अब तुम इसका आनंद अपने अपने कपों में उडे़ल लो।

रोज पी जाती है 300 करोड़ चाय

हर दिन सुबह-शाम की चाय के अलावा दिन भर में ऑफिस में काम के बीच न जाने कितने ही कप चाय गले से उतर जाती है। इसलिए यह कोई आश्चर्य की बात नहीं कि आज पानी के बाद सबसे ज्यादा पी जाने वाला पेय चाय ही है। दुनियाभर में लगभग तीन सौ करोड़ कप चाय रोज पी जाती है और भारत में जितनी चाय उगाई जाती है, उसकी सत्तर फीसदी भारत में ही इस्तेमाल हो जाती है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चाय उत्पादक देश है। दुनिया का दिन बनाने वाली चाय का जन्म चीन में हुआ और आज तक चीन में सर्वाधिक मात्रा में चाय का उत्पादन होता हैं वहीँ निर्यात के मामले में श्रीलंका पहले स्थान पर है। जिसका लगभग सम्पूर्ण विदेशी व्यापार चाय पर निर्भर करता है। 

ऐसे हुआ चाय का आव‍िष्‍कार

चाय के आविष्कार और इसकी पत्तियों की पहचान से जुड़ी रोचक कहानी चीन के एक शासक शेन की हैं। आज से तकरीबन पांच हजार साल पहले की बात है। कहते हैं कि राजा शेन हमेशा उबला हुआ पानी ही पीया करते थे। उनका निजी रसोइया ली, उनके लिए पानी तैयार करता था। एक दिन अनायास ही जब वह पानी को उबाल रहा था तो पास ही उगी झाड़ी की कुछ पत्तियां उसमें आ गिरी, और उबलते जल में वे भी उबल गई और पानी का रंग बदल गया, जब शेन ने वह पानी पिया, तो तुरंत ली को आवाज दी गई, वह अपनी गलती से परिचित था अतः डरते डरते शेन के पास गया तो उसे दंड की बजाय पुरूस्कार दिया गया। शेन को उस पत्तियों से युक्त जल बेहद मनभावन लगा और उसी दिन से वे उस पेड़ की पत्तियों वाले उबले जल को ही पीने लगे वे पत्तियां चाय की थी और इस तरह शेन चाय पीने वाले पहले चीनी शासक थे।

बौद्ध भिक्षुओं ने क‍िया प्रसार

कई साल यही तरीका प्रचलन में रहा बहुत बाद में इसमें प्रयोग किए गए और चाय की पत्तियों मे शक्कर और दूध मिलाकर पीया जाने लगा। मगर चीन ने चाय का यह रहस्य सैकड़ों साल तक गुप्त रखा। कोई खोजकर्ता यह जान न सका कि चीन में पिया जाने वाला यह पेय कैसे बनता है। मगर चीन से कुछ बौद्ध भिक्षु जब जापान गए और उदारता से इन पत्तियों का रहस्य सबको बताया। हां, तब भी वह सूत्र सिर्फ मठों तक ही रहा। मगर यूरोप अभी तक अनजान ही था। लंबे समय चक इंगलैंड के राज दरबार को चाय की कुछ जानकारी तो जरूर थी, पर इतनी जायकेदार है यह चीन ने खबर तक न लगने दी थी। चाय की खोज के तकरीबन दो सौ साल बाद चीन के एक राजदूत ने भेट स्वरूप रानी एलिजाबेथ को उपहार में चाय की पत्तियां भेजी। रानी को यह भेट बहुत पसंद आई और उसने इंग्लैंड के गांव कस्बे तक में इसे प्रसारित करवाया। उस समय चाय की कीमत सौ रूपए प्रति पौंड थी।

लंबे समय तक छुपाया गया चाय का राज

हजारों साल पहले भारत में भी बौद्ध भिक्षुओं ने चाय का इस्तेमाल औषधीय प्रयोजन के लिए किया था। इसके पीछे भी एक बहुत ही दिलचस्प कहानी है अर्थात भारत में चाय पीने का इतिहास लगभग दो हजार साल पहले के एक बौद्ध भिक्षु के साथ शुरू हुआ था। बाद में ये भिक्षु ज़ेन बौद्ध धर्म के संस्थापक बने और इन्होंने सात साल की नींद को त्यागकर जीवन के सत्य को जाना और बुद्ध की शिक्षाओं पर विचार करने का फैसला किया। यह जब चिंतन के अपने पांचवें साल में थे, तो इन्होंने एक झाड़ी के कुछ पत्ते लिए और उन्हें चबाना शुरू कर दिया। इन पत्तियों ने उन्हें पुनर्जीवित रखा और उन्हें जागते रहने के लिए सक्षम बनाया। चूंकि, यह पूरी तरह से प्राकृतिक थी, इसलिए लगभग हर मठ में ही बौद्ध भिक्षुओं ने भी इसका सेवन शुरू कर दिया। चाय पीने से उन्हें शरीर में गर्मी का एहसास होता और ताजगी मिलती थी। लंबे समय तक नींद नहीं आने के कारण वे ध्यान कर पाते थे। जब उन्हें चाय के फायदे मालूम हुए, तो वे अपने साथ इसकी पत्तियों को सहेजकर रखने लगे। कहते हैं कि यह पत्तियाँ चीन से ही कभी लाई गई थीं, पर बहुत समय तक उपयोग में नहीं ली गई थीं। जब ध्यान से इन पत्तियों को जोड़ दिया गया, तब यह सब जगह पाई जाने लगीं। इसलिए यह भी एक मजेदार तथ्य था कि जहां एक ओर चीन की आम जनता और दरबारी चाय के राज को दुनिया से छिपाए हुए थे, वहीं दूसरी ओर बौद्ध भिक्षु जहां भी गए उन्होंने चाय बनाकर पी और अपने आसपास के लोगों को भी पिलाई। इस तरह से चाय के बारे में बौद्ध भिक्षुओं द्वारा जापान, के बाद भूटान, नेपाल और फिर भारत तक जानकारी पहुंच चुकी थी।

लोगों को मुफ्त में प‍िलाई गई चाय

दुनिया में चाय का चलन शुरू ही हुआ था कि ईस्ट इंडिया कम्पनी ने चाय का व्यापार आरम्भ कर दिया। यह कम्पनी चीन से चाय की खरीद करती तथा अधिक दामों में बेचने लगी। मगर 1834 में चीनी सरकार ने चाय की बिक्री पर रोक लगा दी। इसके बाद इंग्लैंड व औपनिवेशिक देशों में चाय के बागान बनाए गए। ईस्ट इण्डिया कम्पनी ही भारत में चाय लेकर आई और कुमाऊं और असम की पहाड़ियों में इसकी खेती की जाने लगी। भारत में चाय के सम्बन्ध में एक हैरान करने वाला तथ्य यह है कि दौ ढाई सौ वर्ष पूर्व यहां कुछ साधकों के अलावा कोई आम जन चाय से इतना भी परिचित नहीं था मगर अंग्रेजी सरकार की चाय पियो योजना के तहत सड़कों पर चाय के ड्रम रखे गए आने जाने वाले लोगों को मुफ्त में चाय पिलाई गई और इसका नतीजा यह हुआ कि आज एक अरब भारतीयों के दिन की शुरुआत चाय की प्याली से ही होती है। तब से धीरे धीरे भारतीयों को इसकी लत लगानी शुरू की गई और देखते ही देखते कम्पनी ने भारत की जमीन पर चाय पैदाकर भारतीयों को ऊंचे दाम में बेचना शुरू कर द‍िया। दार्जिलिंग जैसे चाय के लिए विख्यात पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी चाय की खेती बड़े पैमाने पर की जाती हैं।

कॉफी से ज्‍यादा लाभकारी है चाय

आज भारत में ज़्यादा चाय पत्ती उत्पादन करने वाले राज्यों में से असम, अरूणाचल, त्रिपुरा, सिक्किम, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, हिमाचल, उत्तराखण्ड, पं बंगाल, तमिलनाडु, केरल प्रमुख हैं।

आज दुनियाभर में दो हजार तरह की चाय प्रचलन में है। दूध में चाय पत्ती के साथ अदरक तुलसी काली मिर्च के अलावा लेमन-टी के रूप में चाय का सेवन बहुत लोकप्रिय है। यह स्वाद से भरपूर होता है साथ ही शरीर से हानिकारक तत्वों को भी खत्म करता है, और ताजगी बनाए रखता है। नींबू में पाए जाने वाले विटामिन -सी का लाभ भी शरीर को मिलता है।चाय पर दुनियाभर में किए गए शोधों में यह बात सामने आई है कि कॉफी के मुकाबले चाय अधिक फायदेमंद होती है, क्योंकि इसे छानकर पिया जाता है, जिससे यह कम नुकसानदायक होती है। जबकि कॉफी को बगैर छाने पिया लेने से उसमें मौजूद कैफीन हमारे स्वास्थ्य को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। 

चाय की पत्तियां बालों को चमकदार 

बनाती हैं। अगर आप बालों में अच्छी शाइन चाहते हैं, तो ग्रीन टी का इस्तेमाल करें। हालांकि यह उसी पेड़ से बनती है, जिससे काली चाय आती है। लेकिन इसे बनाने का तरीका कुछ अलग होता है। ग्रीन टी को ऑक्सीडाइज नहीं किया जाता, जिसके चलते इसकी पत्तियों में इलेक्ट्रॉन की संख्या ज्यादा होती है। ये इलेक्ट्रॉन आपके बालों को शाइन देते हैं। अगर आपकी आंखें थोड़ी सूजी हुई हैं, तो ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। इस्तेमाल किए हुए दो टी बैग आपकी समस्या हल कर सकते हैं स्ट्रेस, एलर्जी, ज्यादा शराब पीने या हार्मोनल चेंज की वजह से आंखों में सूजन हो सकती है। लेकिन चाय में मौजूद कैफीन, सूजी हुई खून की नसों को स्किन में दबा देगी और आपकी आंखें पूरी तरह ठीक हो जाएंगी।

ऐसे करें इस्तेमाल:

इस्तेमाल किए हुए दो टी-बैग लें और आंखें बंद करके उनके ऊपर रख लें। दस मिनट तक रखने के बाद उन्हें हटाएं। अब आपकी आंखे फ्रेश होंगी।

अगर आपके अंडरआर्म्स या पैरों पर शेविंग रैश हैं, तो टी बैग का सहारा लें। शेविंग के बाद पांच मिनट तक आर्म्स के नीचे पानी में भीगा टी-बैग दबाकर रखें। यह आपकी स्किन को शेविंग रैश से बचाएगा, जो कि खराब ब्लेड के चलते हो जाते हैं। अगर एक बार में ज्यादा हिस्सा कवर करना चाहते हैं, तो चाय को एक कपड़े में लपेट लें और फिर इस्तेमाल करें।

चाय की पत्ती से खिलेंगे गुलाब

चाय की पत्ती में पाया जाना वाला टैनिक एसिड गुलाब के रंग को और सुंदर कर देता है। इस्तेमाल किए गए टी-बैग को फाड़ें और गुलाब की जड़ के चारों ओर बिखेर दें। यह पेड़ की जड़ों से मिलकर फूलों को काफी सुंदर बना देती है।

इंजेक्शन का दर्द होगा दूर

अगर आपकी स्किन थोड़ी हार्ड है, तो इंजेक्शन लगाने से पहले उस जगह पर ठंडा टी-बैग रखें। कुछ देर रखने से स्किन काफी मुलायम हो जाएगी और इंजेक्शन का असर बिल्कुल भी पता नहीं चलेगा। साथ ही किसी तरह का इन्फेक्शन होने का खतरा भी नहीं होगा।

पैरों को भी बनाएं सुंदर और फ्रेश

अगर दिनभर काम करने के बाद आपके पैरों से थोड़ी गंध आने लगती है या स्किन में कुछ समस्या होती है, तो फिक्र करने की जरूरत नहीं है। महंगे स्प्रे में पैसा लुटाने की बजाय आप घर में ही इस समस्या से निपट सकते हैं। गुनगुने पानी में टी-बैग डालें और हल्का ठंडा होने पर पैरों को उसमें भिगोएं। इससे पसीने की बदबू तो जाएगी ही, आपके पैर कोमल भी होंगे।

चाय से करें मुहासों की छुट्टी

चेहरे पर दाग-धब्बों और मुहासों से परेशान लोगों के लिए ग्रीन टी एक अच्छा विकल्प हो सकती है। यह स्किन में मौजूद बेंजॉइल प्रॉक्साइड को रोकती है, जिससे चेहरे पर स्पॉट नहीं आते।गंदे कारपेट को मिनटों में करें साफअगर आपके घर में कारपेट गंदा है, तो चाय की मदद से आप उसे भी अच्छे से साफ कर सकते हैं। थोड़ी-सी खुली चाय लें और उसे कारपेट पर हल्की-सी परत के रूप में फैला दें। अब केतली से उसके ऊपर थोड़ा-सा पानी डालें और कारपेट में घिसें। 15 मिनट बाद उसे फर्श से हटाएं। अब कारपेट की धूल और गंध दूर हो चुकी होगी।

सन बर्न से बचाएगी चाय

जब आपको काफी ज्यादा वक्त तक धूप में रहना हो और आप इससे बच न सकते हों, तो चेहरे पर सनबर्न के मार्क आना लाजि‍मी है। ऐसे में ठंडे टी-बैग ले और प्रभावित जगह पर लगाएं। प्राकृतिक रूम फ्रैशनर का काम करती हैं चाय अगर सीलन या अन्य किसी कारण से कमरे मे अजीब सी महक आ रही है तो चाय की उबलती हुई पत्तियों से ताजगी भरी हवा को दोबारा संभव किया जा सकता है।

  पूनम पांडे

युवा लेख‍िका