ODOP Scheme: एशिया का सबसे बड़ा इमली बाजार है बस्तर, सालाना एक हजार करोड़ का होता है व्यापार

बस्तर की इमली एक जिला एक उत्पाद में शामिल, केंद्र सरकार की संस्था ट्रायफेड और राज्य सरकार मिलकर कर रही है कार्य, बस्तर में सालाना दो लाख क्विंटल इमली का होता है उत्पादन

Jagdalpur. बस्तर के वनोपज में शुमार इमली ग्रामीणों के आय का मुख्य स्रोत है। इमली के उत्पादन के मामले में का एशिया में सबसे बड़ा बाजार होने के साथ बस्तर में अच्छी गुणवत्ता की इमली पाई जाती है। केंद्र सरकार की संस्था ट्रायफेड और राज्य सरकार ने इमली को एक जिला एक उत्पाद योजना में (ODOP) शामिल किया है। बस्तर जिले में सालाना दो लाख क्विंटल इमली (Tamarind) का उत्पादन (Production) होता है, जिसका व्यापार (Trade) एक हजार करोड़ के लगभग का होता है, अब इसे और बढ़ाने की तैयारी है। शासन की मंशा के अनुसार बस्तर जिले में इसके उत्पादन और प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के साथ ही इसकी मार्केटिंग के लिए बेहतर माहौल तैयार किया जाएगा।

केंद्रीय जनजाति मंत्रालय के अधीन ट्रायफेड के वर्तमान प्रबंध निदेशक (MD) प्रवीण कृष्ण इमली आंदोलन के समय बस्तर के जिला कलेक्टर थे। अब 22 वर्ष बाद एक बार फिर जिला प्रशासन इमली को लेकर सक्रिय हो गया है, लेकिन इस बार इमली आंदोलन चलाने की पहले जैसी कोई योजना नहीं है। बल्कि इमली की ज्यादा से ज्यादा उत्पादन कर ग्रामीणों को इसका लाभ दिलाना है। इसलिए राज्य शासन की एक जिला एक उत्पाद योजना के अंतर्गत जिला प्रशासन ने इमली के उत्पादन और प्रसंस्करण के लिए चिह्नाकित किया गया है।

आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र बस्तर (Tribal majority area Bastar) के ग्रामीण क्षेत्रों में आदिवासी परिवारों के घरों और खेतों में औसतन 02 से 03 इमली का पेड़ हैं, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले के ग्रामीणों की अर्थव्यवस्था में इमली का कितना बड़ा योगदान है। इमली का उत्पादन बढ़ाकर इसके प्रसंस्करण और मार्केटिंग के लिए उपयुक्त बाजार दिया जाता है, तो जिला उत्पाद के रूप में बस्तर की पहचान तो बदलेगी ही साथ ही ग्रामीणो की अर्थव्यवस्था में और ज्यादा मजबूती भी आएगी।

ट्रायफेड के प्रबंध निदेशक प्रवीण कृष्ण इमली आंदोलन के समय बस्तर के जिला कलेक्टर थे। तत्कालीन बस्तर कलेक्टर रहे प्रवीण कृष्ण 22 वर्ष पहले इमली की छांव में गांव का पैसा गांव में के नारे के साथ बस्तर में अभियान चलाया गया था। इमली आंदोलन की गूंज पूरे देश में सुनाई दी थी, तब वन-धन योजना के माध्यम से इमली की खरीदी बिक्री से यहां के युवाओं को जोड़कर इसे बस्तर के ग्रामीण क्षेत्र में सबसे बड़े व्यापार के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया गया था। अब पुन: ट्रायफेड के प्रबंध निदेशक बनने के बाद प्रवीण कृष्ण की पहल पर केंद्र सरकार की योजना पर कार्य करते हुए बस्तर की इमली को एक जिला एक उत्पाद योजना से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है। ट्रायफेड के प्रबंध निदेशक प्रवीण कृष्ण को बस्तर में इमली के उत्पादन की पूरी जानकारी पहले से ही है।

बस्तर में अब ज्यादा से ज्यादा इमली के उत्पादन करने के साथ ही ग्रामीणों के आय बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार की संस्था ट्रायफेड और राज्य सरकार मिलकर कर रही है। इसके लिए यहां पर प्रसंस्करण केंद्र खोले जाएंगे, जहां इमली से कैंडी और सॉस बनाने के साथ ही फूड पार्क के माध्यम से बाहर निर्यात किया जा सकेगा। इसके लिए जिला प्रशासन और वन विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। जिसके तहत बस्तर जिला मुख्यालय के करीब ग्राम सेमरा में वृहद फूड पार्क के निमार्ण का कार्य प्रगति पर है।

बस्तर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष लखेश्वर बघेल ने कहा कि बस्तर में इमली बहुत मात्रा में होती है। ग्रामीणों के आजीविका का यह मुख्य स्त्रोत है, ऐसे में राज्य शासन की एक जिला एक उत्पाद योजना में बस्तर की इमली को चिह्नाकित किया गया है। अब बस्तर में ज्यादा से ज्यादा इमली का उत्पादन करने के साथ ही प्रसंस्करण केंद्र भी खोले जाएंगे, जिसका लाभ ग्रामीणों को होगा।