शहर में बढ़ रहे हैं आवारा कुत्ते, ठीक से नहीं हो रही है नसबंदी

योजना पर मनपा कर चुकी है नौ करोड़ खर्च, नागरिकों के लिए परेशानी का सबब
आईजीआर संवाददाता
Thane.
एनिमल वेलफेयर बोर्ड (Animal Welfare Board) के मानदंड के अनुसार व्यापक स्वरूप में आवारा कुत्तों की नसबंदी अभियान चलाया गया है। इसके माध्यम से बीते तीन से चार वर्षों में सत प्रतिशत कुत्तों की नसबंदी की गई है। हालांकि ठाणे में यह अभियान 15 साल से बेहद धीमी गति से चल रहा था। इसलिए नौ करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी मनपा अपनी सीमा में कुत्तों की शत-प्रतिशत नसबंदी (dogs have been sterilized) नहीं करा पाई है। टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी के चलते ढाई साल से बंद इस अभियान अब दोबारा शुरू किया जाएगा। प्रत्येक सर्जरी के लिए 1,640 रुपए की लागत से अगले तीन वर्षों में 9,000 कुत्तों की नसबंदी करने की योजना है। इसके लिए 1.5 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे (1.5 crore will be spent for this)।

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केंद्र सरकार ने शहर में आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए नसबंदी की अनुमति दे दी है। ठाणे मनपा ने जनवरी 2004 में शहर में आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए एक अभियान शुरू किया था। अक्टूबर 2018 में निधि की कमी के कारण अभियान को रोक दिया गया था। तब तक यह दावा किया गया था कि लगभग नौ करोड़ रुपए की लागत से 58,537 आवारा कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। मनपा के स्वास्थ्य विभाग ने इस अभियान को फिर से शुरू करने के लिए अगस्त 2019 में हुई महासभा में प्रस्ताव रखा था। प्रस्ताव के तहत अगले तीन साल तक प्रति माह 250 से 300 आवारा कुत्तों के ऑपरेशन पर एक करोड़ 55 लाख रुपए खर्च होने का अनुमान था, जिसके लिए अनुमति मांगी गई। महासभा से मंजूरी मिलने के बाद कार्य के टेंडर जारी किए गए। तीन एक्सटेंशन के बाद भी मे. वीटीईएएमएस नामक निविदा देने वाली एकमात्र कंपनी थी। हालांकि उन्होंने एक नसबंदी के लिए 1,640 रुपए की दर से पेशकश की थी। हालांकि दर अधिक होने के चलते मनपा की तरफ से कंपनी को दर कम करने या दर का खुलासा करने का निर्देश दिया गया था। इसे अब स्वास्थ्य विभाग ने स्वीकार कर लिया है और टेंडर को अंतिम मंजूरी के लिए स्थायी समिति के पास भेज दिया गया है।
कुत्तों की जन्म दर की तुलना में नसबंदी धीमी
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार कुत्तों की आबादी दो से तीन प्रतिशत है। उनके अनुसार 2004 में ठाणे में कुत्तों की संख्या लगभग 30,000 थी। अगर रोजाना औसतन 250 कुत्तों की नसबंदी की जाती तो यह अभियान चार साल में पूरा हो जाता। हालांकि मनपा ने प्रतिदिन नौ की धीमी दर से सर्जरी की। पहले चरण में मनपा के स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए जाने वाले यह काम तीन-तीन साल के लिए टेंडर जारी कर वी टीम्स संस्था को दिया गया था। यह दावा किया जा रहा है कि संस्था ने मनपा के खजाने से 4 करोड़ 18 लाख रुपए की वसूली की और 39,084 कुत्तों की नसबंदी की है।


विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization (WHO) के अनुसार, कुत्तों की आबादी दो से तीन प्रतिशत है। उनके अनुसार 2004 में ठाणे में कुत्तों की संख्या लगभग 30,000 थी। अगर रोजाना औसतन 250 कुत्तों की नसबंदी की जाती तो यह अभियान चार साल में पूरा हो जाता। हालांकि, नगर पालिका ने प्रति दिन नौ की धीमी दर से सर्जरी की। पहले चरण में नगर पालिका के स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए जाने वाले कार्यों का तीन साल के लिए टेंडर कर वी टीमों को दिया गया। यह दावा किया जाता है कि संगठन ने नगर निगम के खजाने से 4 करोड़ 18 लाख रुपये की वसूली की और 39,084 कुत्तों की नसबंदी की है। इससे पहले मनपा ने 19,453 कुत्तों की नसबंदी की थी। इसके बाद भी शहर में कुत्तों की संख्या और नस्ल में कमी नहीं आई है।
नसबंदी की तत्काल आवश्यकता
कुत्तों की नसबंदी योजना के आज तक विफल होने के कारण ठाणे मनपा शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित नहीं कर पाई है। इसके अलावा तथाकथित पशु प्रेमी इन कुत्तों को सोसायटी परिसरों में खाना खिलाते हुए उन्हें पालने का काम कर रहे हैं। हालांकि ये कुत्ते स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का सबब बनते जा रहे हैं। कुत्ते आतंकवादियों की तरह घूमते हैं।