लघुकथा : चालाक कीड़ा

एक बूढ़ा कीड़ा और उसका बेटा, मोटी-मोटी किताबों के अंदर रेंगते रहते। एक दिन, छोटे पतंगे ने अपने पिता से पूछा, ‘पिताजी, भोजन के लिए आप मुझे हमेशा पुस्तकों के भीतर ही घुमाते रहते हैं? जबकि मैंने सुना है कि किताबों के मुख्य कवर, उच्च गुणवत्ता के स्वादिष्ट और पौष्टिक काग़ज़ के बने होते हैं और किताब की पीठ पर मीठी लेई लगी होती है। आप मुझे उसका स्वाद चखने क्यों नहीं देते?’ “मेरे मूर्ख बच्चे! यह सही है कि किताब की पीठ अधिक स्वादिष्ट होती है, लेकिन हमें किसी भी हालत में उसे नहीं खाना चाहिए!’ बूढ़े कागजी कीड़े ने जवाब दिया।
“पर क्यूं?”, उसके बेटे ने पूछा। क्योंकि यह कवर ही हमारी सुरक्षा करता है। यदि हम उसे खाते तो लोग. हमें देख लेते हैं और हमें दंड देते हैं. लेकिन जब हम कवर पर नहीं रेंगते तब लोग हमें तब तक नहीं देख पाते, जब तक हम किताब की सारी सामग्री खा ना लें।”