अद्वितीय प्रतिभा के धनी थे रामप्रसाद बिस्मिल: गिरीशचंद्र त्रिपाठी

आलोक गुप्ता
Prayagraj.
ओंकार सेवा समिति के बैनर तले शहीद राम प्रसाद बिस्मिल की जयंती के मौके पर आज वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार के चीफ गेस्ट उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष एवं काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर गिरीशचंद्र त्रिपाठी रहे। उन्होंने कवि जयप्रकाश चतुर्वेदी द्वारा लिखित कृति ‘अमर शहीद बिस्मिल’ का लोकार्पण किया।

आयोजन को खिताब करते हुए गिरीशचंद्र त्रिपाठी ने कहा कि रामप्रसाद बिस्मिल अद्वितीय क्रांतिकारी, उत्कृष्ठ लेखक, कवि और बहुभाषा विद् थे। फांसी के एक दिन पहले बिस्मिल की माताजी मूलारानी, उनसे मिलने पहुंचीं। मां को देखकर बिस्मिल की आंखें भर आईं।
बेटे की आंखों में आंसू देख मां ने कहा मैंने लंबी साधना के बाद तेरे जैसे पुत्र पाया, परंतु यदि तुझे मृत्यु का इतना भय था तो क्रांति का मार्ग क्यों अपनाया। इस पर अपने आंसू पूछते हुए बिस्मिल ने कहा, मां मुझे मृत्यु का जरा सा भी भय नहीं है। परंतु मुझे तेरी जैसी बहादुर मां से बिछडऩे के मोह के कारण आंखों में आंसू आ गए।

रामप्रसाद बिस्मिल के चले जाने के बाद उनकी मां और दादी को आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ा। ऐसे क्रांतिकारी वीरों को हमारी आने वाली पीढिय़ां सदियों तक याद रखेंगी। रामप्रसाद बिस्मिल ने 30 वर्ष की अल्पायु में ही पुस्तकें लिखीं और उससे मिलने वाले धन से शस्त्र खरीदा और उनका उपयोग आजादी की लड़ाई में किया।
वेबिनार के दूसरे वक्ता एडीएम लखनऊ विश्वभूषण मिश्र ने कहा कि युवाओं को उनके दिखाए गए रास्ते का अनुकरण करना चाहिए। अध्यक्षीय उद्बोधन में जयप्रकाश रामप्रसाद बिस्मिल के विभिन्न संस्मरणों का उल्लेख किया।

विशिष्ट वक्ता वरिष्ठ रेल यातायात प्रबंधक अमन वर्मा ने आजाद और बिस्मिल के जीवन पर प्रकाश डाला। वेबिनार में जौनपुर से जय कृष्ण नारायण तुषार ने काव्यपाठ किया। इसके अलावा आकांक्षा त्रिपाठी, दीक्षा उपाध्याय, निवेदिता, अरविंद, अनुराग, धीरेंद्र, मनोज श्रीवास्तव आदि शामिल हुए। संचालन ऑल इंडिया रेडियो के कार्यक्रम अधिकारी आशीष चतुर्वेदी और धन्यवाद ज्ञापन डॉ अरुण कुमार त्रिपाठी ने किया।