ग़ज़ल : कैसे जज़्बात से खेलें ये हुनर रखते हैं

जो भी इन्सान सियासत में दख़ल रखते हैं,
कैसे जज़्बात से खेलें ये हुनर रखते हैं।
चाहे जितनी भी हो मिठास उनके लहजों में,
अपने सीनों में वो भरपूर जहर रखते हैं।
मरे कितने ये ख़बर उन को भले हो, ना हो,
मारा जिस ने है, उसकी तो खबर रखते हैं।
सच फटकता ही नही उनके आस पास कभी,
झूठ कहने में वो मज़बूत जिगर रखते हैं।
घुप्प अंधेरों में पहुंचा दिया सब को अबरार,
अपनी आंखों में वो क्या खूब सहर रखते हैं।

अबरार लखनवी