नट्टू भाई पारेख : एक आम आदमी, ज‍िसने दी हजारों को नई ज‍िंदगी

कहते हैं क‍ि जीवन बहुत सरल है, पर हर बार नहीं… कहते हैं क‍ि दूसरों की सेवा बहुत अच्‍छी बात है, पर अपने बारे में सोचना भी बुरा नहीं। ऐसे व‍िचारों के समय में हम आपको मिला रहे हैं, मुंबई लोकल में सफर करने वाले… सड़क के क‍िनारे खड़े होकर वड़ा पाव खाने वाले एक आम आदम‍ी नट्टू भाई पारेख (60) से। उनका काम ही उन्‍हें आम से खास बना देता है। इतना खास क‍ि आप उनकी कहानी पढ़कर कह उठेंगे, जीना इसी का नाम है…

 नट्टू भाई ने अपना पूरा जीवन लोगों की सेवा में बिता द‍िया। हजारों लोगों के लिए अंधेरे का द‍िया बने और उन्‍हेंं नई ज‍िंदगी दी। कोरोना काल में जब सीन‍ियर स‍िटिजन को घर में रहने की सलाह दी जा रही थी, तब नट्टू भाई लोगों को समुचित इलाज द‍िलाने के ल‍िए भाग-दौड़ कर रहे थे। कोरोना काल में हजारों घरों में राशन का इंतजाम करावाया, सैकड़ों का इलाज करवाकर उन्‍हें घर भेजा। पर, उनके चेहरे पर अच्‍छाई और बड़प्‍पन का दंभ कहीं नजर नहीं आता। उनकी सरलता को नमन, उनके काम को सलाम…

40 हजार लोगों की जिंदगी में लाई खुशियां

नट्टू भाई के प्रयासों से अब तक लगभग 40 हजार लोगों की जिंदगी में खुशियां आई हैं। उन्होंने लगभग 12 हजार लोगों की हार्ट सर्जरी, तकरीबन चार हजार लोगों के कैंसर की सर्जरी और कीमोथ‍ेरेपी, लगभग ढाई हजार लोगों की क‍िडनी डायलिसिस और ट्रांसप्लांट में मदद की। लगभग 900 लोगों के ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी करवाई। कोरोना काल में हजारों लोगों को महीनों भोजन करवाया। सैकड़ों लोगों के इलाज में मदद की। वर्षों से जनसेवा करते आ रहे नट्टू भाई का इतना सम्‍मान है क‍ि उनकी बात पर क‍िसी को अव‍िश्‍वास नहीं, वे जो कह देते हैं, लोग उसे मानकर लोगों की मदद करने को आगे आ जाते हैं।
आज भी रह रहे हैं क‍िराए के मकान में

बता दें क‍ि लगभग 50 वर्षों से मुंबई में रह रहे नट्टू भाई पत्‍नी और दो बच्‍चों के साथ आज भी घाटकोपर में क‍िराए के मकान में रहते हैं। हजारों लोगों की मदद करने वाले नट्टू भाई ने कभी अपने ल‍िए कोई स‍िफार‍िश नहीं करवाई। वे कहते हैं, “कव‍ि प्रदीप का ल‍िखा गीत -दूसरों का दुखड़ा दूर करने वाले, तेरे दुख दूर करेंगे राम, मेरे जीवन का मंत्र है।“  नट्टू भाई बताते हैं, “मेरा जन्‍म गुजरात में हुआ। मेरे पिता सेवा में यकीन करते थे। मेरे जन्‍म के कुछ समय बाद वे मुंबई आ गए। यहां पढाई के बाद मैं एक कंपनी में काम पर लग गया। काम से छूटने के बाद मैं लोगों को इलाज में मदद करता था। 
और सोच ल‍िया सेवा ही जीवन है

बात 1996 की है। मेरे पड़ोस में रहने वाले एक व्‍यक्‍त‍ि का एक्‍सीडेंट हो गया। अस्‍पताल ने उन्‍हें एमआरआई कराने को कहा। उस समय एमआरआई की कीमत साढ़े तीन हजार रूपये थी। जो क‍ि मरीज के पर‍िवार के ल‍िए बहुत बड़ी रकम थी। सभी परेशान थे। मैं अस्‍पताल के डॉक्‍टर अनंत अय्यर से मिला और उन्‍हें सारी परेशानी बताई। उन्‍होंने मेरी बात समझते हुए पैसे कम करके फीस को 1500 कर दिया। यह उस पर‍िवार के लिए बड़ी राहत थी। मैंने उस द‍िन उस पर‍िवार के चेहरे पर जो खुशी देखी उससे मेरा पूरा जीवन ही बदल गया। वह मेरे जीवन के सबसे बेहतरीन पलों में से एक था। उस द‍िन मैंने सोच ल‍िया क‍ि सेवा के काम में जीवन ब‍िताना है।

मुझे लोगों की मदद करना पसंद है

नट्टू भाई बताते हैं, “इसके बाद मेरी नौकरी चली गई। कुछ दिन भटकने के बाद मैं वर्ष 2000 युवक प्रतिष्‍ठान में काम पर लगा। जहां मुझे लोगों की परेशान‍ियां नजदीक से देखने को मिलीं। दुन‍िया में बहुत दुख था। मैंने लोगों की मदद करने की ठान ली। अब लगातार इस काम में लगा हुआ हूं। सच कहूं तो मैंने जीवन में लोगों को स‍िर्फ मार्गदर्शन द‍िया है और यह सब मैं अपने ल‍िए करता हूं, मुझे लोगों की मदद करना पसंद है।“प‍िछले 20 वर्षों से मरीजों की मदद के लिए इस दर से उस दर भटकने वाले नट्टू भाई मरीजों के पैसे से पानी तक नहीं पीते। वे सुबह 9 बजे से शुरू हो जाते हैं, देर रात तक लोगों की मदद में जुटे रहते हैं। वे कहते हैं मैंने अपना न‍ियम बनाया क‍ि अगर एक बार मैंने कि‍सी से नाश्ता पानी कर ल‍िया तो यह मेरी आदत बन जाएगी, फ‍िर ऐसी सेवा का क्‍या मतलब। वे कहते हैं मेरा काम ऐसा है क‍ि लोग एक बार काम होने के बाद फ‍िर कभी लौटते नहीं। इस काम में मेरी पत्‍नी ने मेरी सबसे ज्‍यादा मदद की है। मेरे बच्‍चे भी मेरे काम का सम्‍मान करते हैं। यही मेरी सबसे बड़ी न‍िध‍ि है।