कव‍िता : सच कैसा सच

कलाकृत‍ि : कृष्‍णा

सच
कैसा सच
आधा सच
पूरा सच
कच्चा सच
पक्का सच
इसका सच
उसका सच
तेरा सच
मेरा सच
सच
कैसा सच

गर्भ में ही बेमौत
मरने का सच
जात-पार प्रेम कर फांसी
लटकने का सच
सती बन यूं जिन्दा
जलने का सच
खिलौने छिन बचपन में
ब्याहाने का सच

सच
कैसा सच

बलात्कार झेल बेहिसाब
टूटने का सच
विधवा हो इच्छाएं
कुचलने का सच
डायन कहला पत्थर
खाने का सच
बांझ हो दुत्कार
सहने का सच

सच
कैसा सच

स्कूल से नाम कटा
कमाने का सच
भाई के लिए पेट
काटने का सच
चुनाव जीत पति हिसाब
चलने का सच
जीवंत से पूर्ण निष्क्रिय
होने का सच

सच
कैसा सच
रुढ़ियों में बंघ पंख
कटने का सच
दिली ख्वाइशे के खाक
होने का सच
निवाले से ख्वाबो तक
मोहताज़ी का सच
फट्टे कपड़ो से इज्ज़त
ढकने का सच

सच
कैसा सच
सड़क पे बच्चा
जनने का सच
हर मोड़ तिरस्कार
झेलने का सच
घुट घुट के
जीने का सच
हर क्षण ज़हर
पीने का सच

सच
कैसा सच
पल पल टुटके
बिखरने का सच
हर बार बिखरके
संभलने का सच
विषमताओं से पार
पाने का सच
हार कर जीत
जाने का सच
यूही ख्वाबो को
जीने का सच
औरत की असीम
शक्ति का सच

सच
कैसा सच
आधा सच
पूरा सच
कच्चा सच
पक्का सच
इसका सच
उसका सच
तेरा सच
मेरा सच
सच
कैसा सच

मृदुला घई
स‍िवि‍ल सेवा की वर‍िष्‍ठ अध‍िकारी। साहित्यिक रुझान के चलते हिंदी की कई पत्र पत्रिकाओं में इनकी रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं। ‘यमुना’, ‘कल्लो’, ‘सच’, ‘उड़ान’, ‘बाल विधवा’, ‘बेटी’, ‘सती’, ‘बुनकर’, ‘देश के पत्रकार’ इत्यादि इनकी कुछ प्रमुख रचनाएँ हैं। हाल ही में उनकी रचना ‘देश के पत्रकार’ बहुत सारे समाचार पत्रों में छपी है और सोशल मीडिया में वायरल हो रही है। उर्दू के कई पत्र पत्रिकाओं में इनकी कई रचनाओं का अनुवाद छपा हैं।