स्त्री विमर्श को नए नजरिए से देखने का मौका देती फिल्म

स्त्री से जुड़े मुद्दे पर अक्सर फिल्म बनती रही है, लेकिन इस विमर्श को ‘संदीप और पिंकी फरार’ ‘Sandeep Aur Pinky Faraar’ने नए अंदाज में सामने रखा है। दर्शकों के लिए यह फिल्म पुरानी है, लेकिन इसे अब अमेजन प्राइम पर फिर रिलीज किया गया है, क्योंकि इस फिल्म में नई पीढ़ी के लिए बहुत कुछ है। दरअसल 2017 में इसका प्रोडक्शन स्टार्ट हुआ था और यह रिलीज होने वाली थी 2020 में। मगर वैश्विक कोरोना महामारी के कारण देर हो गई। फिर आखिरकार कुछ महीने पहले थिएटर्स में आई, मगर चली नही और अब कुछ हफ्ते पहले इसे अमेजन प्राइम पर रिलीज कर किया गया है। “यशराज फिल्म्स” “Yashraj Films” के बैनर के बावजूद भी ज्यादा लोग इस फिल्म पर चर्चा कर नही रहे हैं।


‘संदीप और पिंकी फरार’ की सबसे पसंदीदा बात यह है कि यह एक हिंदी चेस थ्रिलर फिल्म है। लेकिन दर्शक जो कुछ किसी फिल्म से उम्मीद करते हैं, यह कहानी उससे काफी अलग है। पहले सीन से ही आपको पता चल जाएगा कि आप दो घंटे के जबरदस्त सफर के लिए निकल चुके हैं। कहानी की शुरुआत एक कार मैं बैठे कुछ दोस्तों की बीच हो रही बातों से होती है और इसी लंबे टेक मैं ओपनिंग क्रेडिट भी आते रहते है। यह इतना शानदार ढंग से लिखा गया ओपनिंग सीक्वेंस है जो शुरू से ही आपका ध्यान आकर्षित करेगा।

संदीप कौर (परिणीति चोपड़ा) Parineeti Chopra एक बैंक में एक बड़ी कार्यकारी अधिकारी है और पिंकी (अर्जुन कपूर) Arjun Kapoor एक सस्पेंडेड हरयाणवी पुलिस ऑफिसर है। यह दोनों बिलकुल अलग व्यक्तित्व वाले लोग हैं। दरअसल बिलकुल अलग दुनिया में रहने वाले लोग के रास्ते किसी तरह एक हो जाते हैं यह दिलचस्प है। खराब परिस्थितियों के कारण, कुछ बुरे लोगो से बचने के लिए और अपनी जान बचाने के लिए दोनों को एक होना पड़ता है साथ में फरार भी होना पड़ता है। दृश्यों और संवादों को विवरण के साथ लिखा गया है। निर्देशन भी कमाल का है और अभिनेताओं ने भी जबरदस्त प्रदर्शन किया गया है।

यह कहानी दिबाकर बैनर्जी और वरुण ग्रोवर written by Dibakar Banerjee and Varun Grover.ने लिखी है। यह फिल्म लिंग भेद पर आधारित society based on gender discrimination भारतीय समाज के भेद खोलती है। दरअसल, यह फिल्म पूर्व परिभाषित पुरुषवादी मानसिकता और मानदंडों के साथ ही पितृसत्ता की अवधारणा के बारे में बताती है । नीना गुप्ता और रघुविंदर यादव की फिल्म में एंट्री होती है, तो लैंगिक असमानता ज़्यादा बारीकी से देखने को मिलते है। रघुविंदर यादव, घर के सर्वेसर्वा हैं जो अपने आप को बेहतर और सुपीरियर मानते है। सिर्फ इसलिए कि वे एक पुरुष हैं। उन्हें खुद कभी नजर ही नहीं आता है कि उनका व्यवहार छोटे छोटे रूप में ही अपनी पत्नी के साथ काफी गलत है। कभी टोकाटाकी के बहाने कभी किसी और बातचीत के बहाने, पुरुषवादी दम्भ सामने आता है। जब नीना गुप्ता अपने विचार सामने रखती है तो उसे कोई महत्व नहीं दिया जाता।

दूसरी तरफ नीना गुप्ता उन महिलाओं को रिप्रेजेंट करती हैं, जो पुरुषवादी व्यवहार से समझौता कर चुकी हैं। यह समझौता इस हद तक है कि उन्हें एहसास नहीं होता कि उसके साथ गलत व्यवहार किया जा रहा है। वह बस इस डिस्क्रिमिनेशन की इतना अभ्यस्त हो चुकी है कि वह अनजान है कि यह कितना गलत है।

परफॉर्मेंस की बात की जाए तो परिणीती चोपड़ा ने बहुत अच्छा काम किया है।
यह जानकर थोड़ा अजीब लगता है कि इस साल परिणीती की तीन फिल्में आई “द गर्ल ऑन द ट्रेन” और “सायना”, और इन दोनों से काफी बेहतर काम परिणीता ने “संदीप और पिंकी फरार” में किया है, मगर इसी मूवी की चर्चा ही नहीं हुई। यहां उन्होंने दमदार भूमिका निभाई है।
अर्जुन कपूर पुराने ढर्रे पर हैं। पिंकी उर्फ सतिंदर डाहिया की भूमिका में वे ठीकठाक हैं। पिंकी का एक्सेंट, उनका एक डांस सीक्वेंस, गुस्से से लेकर सेंसिटिविटी, हर एक डिफिकल्ट सीन को अर्जुन कपूर ने बखूबी निभाया है।
सिनेमेटोग्राफी की बात की जाए तो अनिल मेहता ने काफी बढ़िया तरह एक एटमॉस्फियर क्रिएट किया है जो हमे हर वक्त फिल्म के इमोशंस से जोड़े रखता है। इंटेंस कलर्स, डल लाइटिंग्स, शेडी सेट्स, सब कुछ फिल्म में थोड़ा अनसेटलिंग माहौल बनाए रखते हैं, जो जरूरी है। इसी के साथ फिल्म का बढ़िया बैकग्राउंड म्यूजिक इस माहोल को कॉम्पिलमेंट करता है। अनु मलिक द्वारा बनाया गाना “फरार” फिल्म में अलग जान डाल देता है।
बहुत सारे विषय इस फिल्म में दर्शकों को बांधे रहते हैं। वर्ग विभाजन, घातक पुरुषत्व, समाज में मौजूद अंतर्निहित लिंगभेद, समाज में मौजूद पाखंड, भ्रष्टाचार आदि। बस फिल्म में एक दिक्कत यह है कि बीच-बीच में कई सीन्स खींचे हुए लगते हैं। फिल्म थोड़ी स्लो हो जाती है। दर्शक धैर्य से देखें, तो कई ज्वलन्त मुद्दों से रूबरू हो सकते हैं।

यह बहुत अच्छी तरह से लिखी, बहुत अच्छे अभिनय से सजी फिल्म है। इसका फिल्मांकन और निर्देशन भी उम्दा है। इसे अमेजॉन प्राइम पर देखा जा सकता है।

मुग्‍धा