प्रेरक प्रसंग : आवश्यक क़दम

प्रसिद्ध रोमन सम्राट जूलियस सीजर का जन्म 101 ई.पू. में एक रोमन अभिजात्य कुल में हुआ था। इस कुल के लोग स्वयं को वीनस देवी का वंशज मानते थे। सीजर ने रोमन गणतंत्र में अपने आप को एक तानाशाह के रूप में स्थापित कर लिया था। कहने भर को सारे प्रशासकीय निर्णय रोमन सीनेट की बैठक में लिए जाते थे। पर राजसत्ता का मुख्य केंद्र सीजर का निवास स्थान ही था। जूलियस सीजर को एक बार पत्रों का एक पुलिंदा मिला, जो उनके किसी विरोधी ने लिखे थे। सीजर ने उन्हें बिना पढ़े ही आग के हवाले कर दिया। यह देखकर एक मित्र ने कहा, ‘आपने पत्र जलाकर अच्छा नहीं किया। अपने शत्रु के प्रमाण के रूप में ये पत्र अच्छे दस्तावेज साबित हो सकते थे।’
अपने हितैषी को परामर्श के लिए धन्यवाद देने के बाद बड़े सधे अंदाज में सीजर ने कहा, ‘यद्यपि’ मैं क्रोध के प्रति सदैव सतर्क रहता हूं, पर मेरी दृष्टि में उससे भी ज्यादा आवश्यक क़दम यह है कि क्रोध के कारण को ही मिटा दिया जाए।’