आदर्श परिवार के संघर्ष को दर्शाती है मीनारी

डायरेक्टर: ली इसाक चुंग

स्टार कास्ट: यूं यूह-जंग, स्टीवन येउन, हान ये-री, एलन किम, नोएल चो

अवधि: 1 घंटा 56 मिनट

सर्टिफिकेट: U/A, 13+

रेटिंग: 4\5

एक खुशहाल परिवार हर किसी का सपना होता है, लेकिन इसके अंदर भी उथल—पुथल और सुख—दुख का संघर्ष साथ चलता है, ऐसे ही संघर्ष को दर्शाती है कोरियन फिल्म ‘मीनारी।’ मीनारी एक ईस्ट एशिया का पौधा है, जो साउथ कोरिया में कई व्यंजनों में इस्तेमाल किया जाता है। इस पौधे की खासियत यह है कि यह अपने सेकंड सीजन में यानी की एक बार मर जाने के बाद जब दूसरी बार उगता है तो ज्यादा बेहतर रूप में होता है।

मीनारी (Minari) की खासियत यह है कि यह पौधा किसी भी परिस्थिति में उगाया जा सकता है, भले ही फॉरेन लोकेशन में इसके बीज क्यों न बोए गए हों। जहां भी यह बोए जाएं वहां वह अपने देश की विशेषताएं रखने में कामयाब रहता है। मीनारी पौधे के यह सारे गुण इस पारिवारिक फिल्म की कहानी के मेटाफर (Metaphors) हैं। इस पौधे की हर एक विशेषता फिल्म के किरदारों और परिस्तिथियों के रूपक हैं।
दरअसल यह फिल्म है एक इमिग्रेंट फैमिली के ऐसे स्ट्रगल की, जो अपने ‘अमेरिकी ड्रीम’ (‘American Dream’.) को पूरा करने के लिए कई परेशानियों से गुजरती है।

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1980 के परिदृश्य की इस कहानी में जैकब यी (स्टीवन येउन) का सपना है। एक कामयाब फार्मर बनने का सपना वह पूरा करने को तत्पर होता है। उन्हे अर्कांसस में एक बड़ी जमीन अच्छे दाम में मिल जाती है। उनकी पत्नी मोनिका (हान ये-री) और उनके दो बच्चे डेविड (एलन किम) और एनी (नोएल चो) भी वही आ जाते हैं। यह परिवार कैलिफोर्निया से यहां शिफ्ट हुआ है। जहां एक तरफ जैकब खुश है कि वो इस जमीन के साथ कुछ कामयाबी हासिल कर अपने बच्चों के सामने एक अच्छा उदाहरण रख सकेगा। वहीं दूसरी तरफ मोनिका कई कारणों से हर वक्त चिंतित रहती है। वो इस स्थान बदलाव से बिल्कुल खुश नहीं है और अपने बेटे डेविड के लिए भी उसे हरदम डर लगा रहता है। दरअसल डेविड को दिल की बीमारी है और ऐसी बीमारी है कि कभी भी हॉस्पिटल जाना पड़ सके और चेकअप के लिए या शायद सर्जरी की भी जरूरत हो, ऐसे हालात में एक सुनसान जगह घर होना, जहां आसपास न तो हॉस्पिटल है और न ही स्कूल या चर्च है। यह हालात मोनिका को सोचने पर मजबूर कर देता है कि जैकब के लिए उसके सपने अपने परिवार से कहीं ज्यादा जरूरी हो चुके हैं।

कहानी में नया मोड़ तब आता है जब मोनिका की मां सून जा (यूं यूह-जंग) की एंट्री होती है (The story takes a new turn when Monica’s mother Soon Jaa (Yoon Yuh-jung) enters)।
क्योंकि मोनिका और जैकब काम के लिए बाहर रहते हैं तो नानी बच्चों का खयाल रखती है, जहां एक तरफ मोनिका की खुशी का ठिकाना नहीं होता कि उसकी मां उनके साथ रहेंगी, वहीं दूसरी तरफ डेविड को एक अलग नफरत और चिढ़ सी पैदा होने लगती है अपनी नानी के प्रति। डेविड के दिमाग में एक नानी की जो छवि बनी है, वह थोड़ी अलग होती है। उसे लगता है उसकी नानी स्वादिष्ट खाना बना कर खिलाए या अच्छी तरह से बात करे, लेकिन सूनजा काफी अलग स्वभाव की है। वो पत्ते खेलती है और कभी कभी हल्की गालियां भी दे देती है। सून जा का तजुर्बा इस जीवन में संघर्ष कर रहे परिवार में कई बदलाव लेकर आता है।

काफी सारे बदलाव और उतार—चढ़ाव फिल्म में सामने आते रहते हैं। जैकब खुद को बस एक परिवार के पालनहार के रूप में देखता है, जिस कारण वो पैसे कमाने और बड़ा सपना पूरा करने में ज्यादा ध्यान देता है, बजाय अपने परिवार के भावनात्मक लगाव के। दूसरा थीम है इमिग्रेंट फैमिली के स्ट्रगल और एक्सपीरियंस, तीसरा, फैमिली डायनामिक्स और जेनरेशन गैप के कारण आती मुश्किल और लाभ को भी देखा जा सकता है। इसके अलावा भी कई उथल—पुथल वाले दृश्य फिल्म में आते—जाते रहते हैं। भले ही यह एक कोरियन मूवी है मगर आप यी फैमिली में अपने कल्चर या अपने देश के परिवार के रहन—सहन को महसूस कर सकेंगे। इस फिल्म को रोजमर्रा जिंदगी के कामकाज से सीन्स से पिरोया गया है। जैसे नौकरी के लिए जाना, टीवी देखना, बच्चों का आपस में खेलना, मां का घर में खाना बनाना आदि, बस ऐसे ही कुछ पलों के कारण फिल्म रियलिस्टिक टच बनाए रखती है और कहीं हद तक आप अपनी ज़िंदगी से रिलेट कर सकते हैं।


परफॉर्मेंस हर एक एक्टर ने बढ़िया की है। सून जा के रोल के लिए, यूं यूह-जंग को बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के लिए ऑस्कर भी मिला है। बेस्ट एक्टर के लिए स्टीवन यून ऑस्कर में नॉमिनी थे। इनके अलावा हन ये री, विल पैटन, नोएल चो ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। वहीं दिल को छू लेने वाली एक्टिंग एलन किम ने की है।


फिल्म के डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले के लिए भी ली इसाक चुंग को नॉमिनेट किया गया था। दरअसल डायरेक्टर की ज़िंदगी के कुछ असल किस्से—कहानियां भी इस फिल्म का हिस्सा हैं, मीनारी दरअसल कुछ हद तक ली इसाक चुंग की सेमी–ऑटोबायोग्राफी है। उन्होंने हर एक कैरेक्टर और उनके बीच की रिलेशनशिप्स को डिटेल्ड सीन्स से काफी अद्भुत तरह से डिफाइन किया है। डायरेक्शन जितनी ही खूबसूरत सिनेमेटोग्राफी भी है। यी फैमिली एक सुनसान फील्ड में एक ट्रेलर के अंदर आइसोलेटेड रहती है और कैमरे में फील्ड और नेचर की ब्यूटी के साथ परिवार के अकेलेपन को विजुअली visually बहुत अच्छे से दिखाया है। फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर इन सारी थीम्स को अच्छे से कैद करता है और अलग -अलग परिस्थिति मैं ऑडियंस को एक ड्रीमी वातावरण में जगाए रखता है।
फिल्म बेहद खूबसूरत है। यह ऑथेटिंक इमोशंस से भरी हुई फिल्म कही जा सकती है। इसमें कहीं भी जबरदस्ती का मेलोड्रामा नज़र नही आता। सब कुछ रियलिस्टिक है और यह फिल्म आपकी मस्ट वाच Must Watch लिस्ट में जरूर होनी चाहिए। आप इस फिल्म को अमेजन प्राइम पर देखा जा सकता है।
—मुग्धा पांडे