मनपा ने 38 डॉक्टरों को हटाने का किया फैसला


विरोधी पक्ष ने शुरू किया विरोध
ठाणे
. ठाणे मनपा प्रशासन (tane Manpa administration) ने उन 38 चिकित्सकों को हटाने का फैसला किया है, जिन्होंने कोरोना महामारी के दौरान अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करते हुए जीवन और मौत के मुहाने पर खड़े मरीजों को नई जिंदगी दी है। मनपा ने सभी 38 चिकित्सकों के हाथ में बाकायदा नोटिस थमा दिया है। इसे मनपा में विरोधी दल राकांपा ने मुद्दा बना लिया है। मनपा में नेता प्रतिपक्ष शानू उर्फ अशरफ पठान ने कहा है कि हम इस तरह किसी भी चिकित्सक को बर्खास्त करने की कोशिश को बिल्कुल भी सहन नहीं करेंगे। उन्होंने मांग किया है कि सभी 38 चिकित्सकों को सेवा में रखा जाए। इस संबंध में पठान ने मनपा आयुक्त डॉ. विपिन शर्मा को ज्ञापन दिया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि उन्होंने चिकित्सकों पर हो रहे अन्याय को दूर करने के लिए आवास मंत्री जितेंद्र आव्हाड से बात की है। इस पर जल्द ही हल निकाला जाएगा। पत्र में  पठान ने कहा कि मनपा के ग्लोबल कोविड सेंटर में 46 चिकित्सकों को निकालने की तैयारी चल रही है।  


चिकित्सकों पर बर्दाश्त नहीं करेंगे अन्याय
कोरोना की दूसरी लहर शुरू होते ही मरीजों के उपचार के लिए ठाणे मनपा के ग्लोबल कोविड सेंटर में बीयूएमएस डॉक्टरों को तैनात किया गया था। मनपा इन चिकित्सकों को 60 हजार रुपए से 1.5 लाख रुपए तक दी जा रही थी। इन डॉक्टरों ने बेहद प्रतिकूल परिस्थितियों में काम किया था। कोरोना संक्रमितों का उपचार करते हुए कई डॉक्टर इससे संक्रमित भी हुए थे। हालांकि मरीजों की संख्या घटते देख इन डॉक्टरों को कम करने का फैसला लिया जा रहा है। इसकी जानकारी होते ही हटाए जा रहे डॉक्टर की एक टीम ने मंगलवार को विरोधी पक्षनेता शानू पठान से मुलाकात की। इस दौरान शानू पठान ने कहा था कि वह इस अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेंगे।


जरूरत पडऩे पर डॉक्टर का करें इस्तेमाल
शानू पठान ने कहा कि जिस समय ठाणे महानगर पालिका को जरूरत थी, उस समय उसने इस डॉक्टर का इस्तेमाल किया। मनपा अब इनसे अपना पीछा छुड़ाने का प्रयास कर रही है। हम मनपा के इस प्रयास को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेंगे। बीयूएमएस डिग्रीधारी डॉक्टर, जिन्होंने कोविड काल में ठाणेकरों की जान बचाने के लिए दिन-रात काम किया। उन्हें इस तरह से अधर में छोडऩा यह किसी तरह के न्याय में शामिल है। पठान ने कहा कि ऐसे सभी डॉक्टरों को ठाणे मनपा की सेवा में रखा जाए। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि उन्हें कौसा के नए अस्पताल में नियुक्त किया जाए, नहीं तो हम मनपा मुख्यालय के गेट पर आंदोलन में बैठेंगे।