महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी से की मुलाकात, मराठा आरक्षण मुद्दे और जीएसटी मुआवजे पर चर्चा

आईजीआर संवाददाता
New Delhi.
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और मराठा आरक्षण, लंबित जीएसटी मुआवजे और कांजूर में प्रस्तावित मेट्रो कारशेड से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री और राकांपा के वरिष्ठ नेता अजीत पवार और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक चव्हाण ठाकरे के साथ थे (Deputy Chief Minister and senior NCP leader Ajit Pawar and senior Congress leader Ashok Chavan accompanied Thackeray on the occasion.)। पीएम से मुलाकात के बाद ठाकरे ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि “मराठा आरक्षण, मेट्रो कारशेड, जीएसटी मुआवजे से संबंधित मुद्दों पर प्रधानमंत्री के साथ चर्चा की गई।”


उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने मुद्दों पर गौर करने का आश्वासन दिया है। अजीत पवार ने कहा कि हमारे बीच बैठक डेढ़ घंटे तक चली।
बता दें कि नवंबर 2019 में राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभालने के बाद उद्धव ठाकरे की दिल्ली की यह दूसरी यात्रा है।
शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस सरकार मेट्रो कारशेड को कांजूर ले जाना चाहती है। राज्य और केंद्र दोनों ही जमीन पर अपना दावा करते हैं। मामला फिलहाल कोर्ट में विचाराधीन है।
पिछली देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली भाजपा सरकार ने आरे में मेट्रो कारशेड (Metro carshed) बनाने का फैसला किया था, लेकिन इसका पर्यावरणविदों की तरफ से जोरदार विरोध किया गया था। उद्धव ठाकरे के पदभार ग्रहण करने के बाद, महाविकास अघाड़ी सरकार ने कारशेड को कांजूर में स्थानांतरित करने की घोषणा की। तब से कारशेड के लिए जगह विवादास्पद हो गई है।

महाराष्ट्र के वित्त मंत्री अजित पवार ने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ हुई बैठक में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) मुआवजे से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा की गई। पवार ने कहा कि महाराष्ट्र को जीएसटी मुआवजे के रूप में लगभग 46,000 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद थी, लेकिन उसे केवल 22,000 करोड़ रुपये ही मिले हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र को अभी भी 24,306 करोड़ रुपये मिलने हैं। राज्य कोरोना वायरस महामारी से जूझ रहा है और इसका उसके राजस्व पर असर पड़ रहा है और मुआवजे की राशि जल्द से जल्द दी जानी चाहिए।”
मराठा आरक्षण का मुद्दा एजेंडे में सबसे ऊपर था (Maratha reservation issue was top of the agenda)। प्रतिनिधिमंडल की संरचना महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि इसमें दो वरिष्ठ मराठा नेता-पवार और चव्हाण शामिल थे।मराठा राज्य में एक प्रमुख समुदाय है और यह नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण की मांग करता रहा है। राज्य सरकार ने मराठा समुदाय को आरक्षण देने के लिए एक कानून बनाया, लेकिन अदालत ने इसे रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने राज्य सरकार की समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया था। फैसले के बाद से ही सरकार पर कार्रवाई का दबाव बढ़ रहा है।

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पत्रकारों को जानकारी देते हुए अशोक चव्हाण (Briefing reporters, Ashok Chavan) ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में मराठों के लिए कोटा खत्म करने के बाद, अब इस पर निर्णय लेने की सारी शक्ति केंद्र के पास है। उन्होंने कहा कि केंद्र को शिक्षण संस्थानों में आरक्षण पर 50 फीसदी की सीलिंग को खत्म करने के लिए कदम उठाने चाहिए। ठाकरे ने कहा कि मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने का मुद्दा भी केंद्र के पास लंबित है। अजित पवार ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने मोदी से महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को राज्य विधान परिषद के लिए 12 सदस्यों के नामांकन को मंजूरी देने का निर्देश देने के लिए भी कहा, जैसा कि राज्य मंत्रिमंडल ने तय किया था।
प्रतिनिधिमंडल ने महाराष्ट्र के लिए एक बल्क ड्रग पार्क और इसके लिए 1,000 करोड़ रुपये के केंद्रीय आवंटन की भी मांग की। इसने कहा कि महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) ने इस उद्देश्य के लिए 250 एकड़ भूमि का चयन किया है।