प्रभु रथ रोको!

प्रलय की तैयारी है
बिना शस्त्र का युद्ध है जो,
महाभारत से भी भारी है
कितने परिचित कितने अपने
आखिर यूँ चले गए
जिन हाथों में धन-संबल
सब काल से छले गए
हे राघव माधव – मृत्युंजय, पिघलो,
ये विनती हमारी है
ये बिना शस्त्र का युद्ध है जो,
महाभारत से भी भारी है ।

रामधारी सिंह दिनकर

रामधारी सिंह ‘दिनकर

हिन्दी के एक प्रमुख लेखक, कवि व निबन्धकार थे। वे आधुनिक युग के श्रेष्ठ वीर रस के कवि के रूप में स्थापित हैं। ‘दिनकर‘ स्वतन्त्रता पूर्व एक विद्रोही कवि के रूप में स्थापित हुए और स्वतन्त्रता के बाद ‘राष्ट्रकवि’ के नाम से जाने गये।