5 सुपर फूड, रखें सेहत दुरुस्त

आजकल सुपर फूड व वंडर फूड शब्द का चलन ज़ोरों पर है। यह सुपर फूड कोई नए प्रकार के फूड नहीं हैं,बल्कि ये हमारे आस-पास पाए जाने वाले फूड्स ही हैं, परंतु हम इनमें पाए जाने वाली ढेरों ख़ूबियों से अनजान हैं और इसी कारण आमतौर पर ये हमारे दैनिक आहार का हिस्सा नहीं बन पाते हैं। आज आर्युवेद के डॉक्‍टर महेश संघवी से जानते है 5 सुपर फूड के बारे में, ज‍िनसे हमारी सेहत बेहतर से बेहतरीन रहती है।

धीरज स‍िंंह 
मुंबई. डॉक्‍टर संघवी बताते हैं क‍ि सुपर फूड उन प्राकृतिक भोज्य पदार्थों को कहते हैं, जिनमें पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, ये स्वास्थ्यवर्द्धक होते हैं और इनका स्वास्थ्य पर कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है। भाग-दौड़ के इस समय में अगर हमारा खान-पान सही है तो हम स्‍वस्‍थ हैं। आइए जानें ऐसे ही कुछ भोज्य पदार्थों के बारे में जो सुपर फूड की श्रेणी में आते हैं।
1. किन्वाह (QUINOA)
डॉक्‍टर संघवी बताते हैं क‍ि यह एक प्रकार की जई (OATS) है, जो कि आजकल ‘सुपर ग्रेन ऑॅफ़ फ्यूचर’ के नाम से प्रचलित हो रहा है। इसकी सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि इसमें ग्लूटन नहीं होता है, इसलिए यह सिलीयक बीमारी के रोगियों के लिए अच्छा विकल्प है। इसके अलावा किन्वाह में अन्य अनाजों की तुलना में दोगुना फाइबर पाया जाता है। इसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन सभी आवश्यक अमिनो एसिड्स (AMINO ACIDS) के साथ पाया जाता है तथा अन्य न्यूट्रिन्टस (NUTRIENTS) जैसे — आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन बी2 (B2), जिंक तथा फोलेट आदि भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है। यह ब्लड शुगर तथा वज़न को नियंत्रित करने में सहायक है।

2. कटहल 

यह विटामिन, मिनरल्स, फाइटो-न्यूट्रिंट्स, कार्बोहाइड्रेड, इलेक्ट्रोलाइट, फाइबर का अच्छा स्रोत है। फाइटो-न्यूट्रिंट्स का अच्छा स्रोत होने के कारण यह विभिन्न प्रकार के कैंसर से बचाता है तथा स्वस्थ त्वचा के लिए लाभदायक है। यह ब्लड प्रेशर को संतुलित करने तथा पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में सहायक है। कटहल रक्त निर्माण में भी सहायक है, इसलिए अनीमिया के इलाज व बचाव में भी उपयोग में लिया जाता है। यह हृदय रोग, थायराॅइड तथा डायबिटीज में भी लाभदायक है। इसके अतिरिक्त कटहल हमारे नेत्रों, बालों तथा हड्डियों के लिए भी स्वास्थ्यवर्द्धक है। कटहल इन्हीं ख़ूबियों के कारण इसे ‘जैक ऑफ़ आल फ्रूटस’ भी कहा जाता है।
3. व्हीट ग्रास 

व्हीट ग्रास का प्रयोग सामान्यतः जूस के रूप में किया जाता है। इसे ‘ग्रीन ब्लड’ भी कहा जाता है, क्योंकि व्हीट ग्रास में प्रचुर मात्रा में आयरन, विटामिन बी12 तथा अन्य बहुत से पोषक तत्व व एक्टिव एंजाइम्स पाए जाते हैं, जो सीधे रूप से हमारे शरीर में रक्त का निर्माण करने में सहायता करते हैं। घास की उगाई के सातवें दिन पर घास के ऊपरी हिस्से को काटकर इसका ताज़ा जूस बनाकर पिया जाता है। इसे सुखा कर पाउडर के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। व्हीट ग्रास जूस थैलेसीमिया, कीमोथैरेपी से गुज़र रहे कैंसर रोगियों तथा उन सभी बीमारियों जिनमें शरीर में रक्त निर्माण की आवश्यकता बढ़ जाती है, बहुत लाभकारी सिद्ध होता है।
4. सोयाबीन
सोयाबीन में अन्य दालों की तुलना में अधिक मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। इसमें प्रोटीन के अलावा कैल्शियम, आयरन तथा फाइबर अच्छी मात्रा में पाया जाता है। सोयाबीन का प्रयोग आटे, टोफू, चाय तथा सोयामिल्क रूप में किया जाता है। सोयाबीन बाज़ार में मिलने वाले महंगे प्रोटीन सप्लीमेंट्स का अच्छा विकल्प है। सोयाबीन कैंसर, हृदय रोग तथा डायबिटीज में लाभकारी है। सोयाबीन का प्रयोग करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि इसका प्रयोग उबालकर सुखाकर करना चाहिए।
5. रागी
रागी में कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन तथा मिनरल्स पाए जाते हैं। रागी आसानी से पचने वाला तथा ग्लूटन फ्री अनाज है। रागी में कैल्शियम अच्छी मात्रा में पाया जाता है, इसलिए यह हड्डियों को मज़बूत बनाता है तथा ऑस्टीयोपोरोसिस (OSTEOPOROSIS) से बचाता है। इसके अलावा हीमोग्लोबिन बढ़ाता है, डायबिटीज, हृदय रोग से बचाता है तथा वज़न नियंत्रित करता है।
डॉक्‍टर महेश संघवी
आर्युवेद के एमडी हैं
मुंबई में नि‍वास