गोरखपुर : डबल डेकर के पांच कोचों में लगे बायोटायलेट, नौ में जल्दी ही होगा पूरा

Gorakhpur. अब डबल डेकर ट्रेनें बायोटायलेट के बिना नहीं चलेगी। इस क्षेत्र में कार्य शुरू है (Work has started in this area)। गोरखपुर स्थित यांत्रिक कारखाने में डबल डेकर के 05 कोचों में बायोटायलेट लग गए हैं। शेष नौ में भी जल्दी ही इन्हें लगा दिया जाएगा। इधर, ‘हमसफर’ के एक रेक में हवाई जहाज वाले बायोटायलेट लगाने की तैयारी की जा रही है।
अब रेल की पटरियों (rail line) पर टायलेट की गंदगी नहीं गिरेगी। प्लेटफार्म भी पूरी तरह साफ-सुथरे रहेंगे। ‘स्वच्छ रेल-स्वच्छ भारत’ अभियान (Work has started in this area) के तहत पूर्वोत्तर रेलवे की ट्रेनों में लगने वाले कुल तीन हजार 355 कोचों में बायोटायलेट लगा दिए गए हैं। अब सिर्फ लखनऊ से दिल्ली के बीच चलने वाली डबल डेकर ट्रेन के 14 और 23 हाइब्रिड कोच में लगने शेष हैं। जल्दी ही इनके जुड़े कार्य भी पूरे कर लिए जाएंगे।  
ऐसे काम करता है बायोटायलेट
सामान्य टायलेट की तरह बायोटायलेट की गंदगी नीचे नहीं गिरती है। यह पानी में घुलकर कुछ बह जाती है। कुछ गैस बनकर हवा में उड़ जाती है। इस प्रक्रिया के लिए बायोटायलेट के टैंक में बैक्टीरिया छोड़े जाते हैं। बता दें कि अब तक ट्रेनों के कोचों में सामान्य टायलेट ही लगते थे। इसके चलते टायलेट की पूरी गंदगी रेल लाइनों पर ही गिरती थी। गंदगी के चलते प्लेटफार्मों पर खड़ा होना मुश्किल हो जाता था। 
हमसफर के एक रेक में लगे हवाई जहाज वाले बायोटायलेट
आने वाले दिनों में ट्रेनों में भी हवाई जहाज में लगने वाले अति आधुनिक वैक्यूम बायोटायलेट लगेंगे। रेलवे बोर्ड के निर्देश पर पूर्वोत्तर रेलवे से चलने वाली हमसफर एक्सप्रेस के एक रेक में वैक्यूम बायोटायलेट लगाकर परीक्षण किया जा रहा है। इस टायलेट में गंदगी और बदबू नहीं फैलती है। टायलेट भी साफ-सुथरा रहता है।
बोले सीपीआरओ

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पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह का कहना है कि ‘स्वच्छ रेल-स्वच्छ भारत मिशन’ के अंतर्गत पूर्वोत्तर रेलवे के लगभग सौ प्रतिशत कोचों में बायोटायलेट लगाने का कार्य पूरा है। कुछ कोच शेष बचे हैं। उनमें भी बायोटायलेट लगाने की प्रक्रिया चल रही है। यांत्रिक कारखाना गोरखपुर में पहली बार डबल डेकर कोचों में बायोटायलेट लगाए जाने का कार्य किया जा रहा है।