जी7 देशों के बीच ग्लोबल कॉरपोरेट टैक्स पर सहमति, गुगल, फेसबुक जैसी कंपनियों पर पड़ेगा असर

New Delhi. दुनिया के सबसे विकसित 7 देशों के समूह जी-7 (G-7 of the world’s) के बीच ग्लोबल कॉरपोरेट टैक्स को लेकर ऐतिहासिक सहमति बन गई है। इसके जरिए ग्लोबल टैक्स सिस्टम में सुधार की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। बताया जा रहा है कि जी-7 देशों के बीच हुई सहमति के मुताबिक ग्लोबल कॉरपोरेट टैक्स की न्यूनतम दर 15 फीसदी के स्तर पर रखने की सहमति बनी है (minimum rate of global corporate tax at the level of 15 percent)। इस सहमति के बाद गूगल, फेसबुक, अमेजॉन जैसी बड़ी कंपनियों से विकसित देशों को टैक्स के रूप में बड़ी राशि मिल सकेगी। इसके साथ ही आने वाले दिनों में दुनियाभर के उन तमाम देशों को इन कंपनियों को टैक्स के रूप में बड़ी राशि का भुगतान करना पड़ेगा, जहां वे अभी मामूली टैक्स का भुगतान करके काम कर रही हैं। अभी ये कंपनियां ग्लोबल टैक्स स्ट्रक्चर की अस्पष्टता के कारण बहुत मामूली टैक्स का भुगतान करती रही हैं। यही वजह है कि जी-7 देशों ने लंबे समय तक बातचीत करने के बाद ग्लोबल कॉरपोरेट टैक्स और उसकी न्यूनतम दर के बारे में सहमति बनाई है। 

जी-7 देशों के बीच हुए समझौते के मुताबिक ग्लोबल कॉरपोरेट टैक्स का भुगतान उसी देश में किया जाएगा, जिस देश में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के तर्ज पर काम कर रही गूगल, फेसबुक, अमेजॉन जैसी कंपनियां व्यापार कर रही होंगी। इस सहमति में साफ किया गया है कि किसी भी देश में ग्लोबल कॉरपोरेट टैक्स कम से कम 15 फीसदी की दर से वसूला जाएगा। कोई भी देश इस मामले में कंपनियों को किसी भी तरह की रियायत नहीं देगा। टैक्स की अधिकतम सीमा उस देश की सरकार तय करेगी। 

बताया जा रहा है कि यह समझौता इसलिए भी काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अभी अंतरराष्ट्रीय टैक्स ढांचे को लेकर नियमों में काफी अस्पष्टता है। नियमों और प्रावधानों में पारदर्शिता नहीं होने की वजह से बड़ी कंपनियां इसका जमकर फायदा उठाती हैं और बहुत कम टैक्स का भुगतान करती हैं। जिससे जिस देश में ये कंपनियां व्यापार कर रही होती हैं, उस देश की सरकारों को टैक्स के रूप में भारी भरकम नुकसान का सामना करना पड़ता है। 


बताया जा रहा है कि जी-7 देशों (G-7 countries) की के बीच ग्लोबल कॉरपोरेट टैक्स को लेकर सहमति बन जाने के बाद ग्लोबल पैक्ट को तैयार करने में काफी सहूलियत होगी। अगले महीने ही ग्लोबल पैक्ट तैयार करने को लेकर बैठक होने वाली है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों से टैक्स वसूली के नियमों पर चर्चा करके उसे अंतिम रूप दिया जाना है। बताया जा रहा है कि जी-7 देशों के बीच ग्लोबल कॉरपोरेट टैक्स को लेकर बनी सहमति ग्लोबल टैक्स सिस्टम (regarding the international tax structure) तैयार करने के लिए एक आधार का काम करेगी। 

जानकारों के मुताबिक बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को अपने देश में काम करने के लिए आकर्षित करने के इरादे से दुनिया के तमाम देश कॉरपोरेट टैक्स की दर को काफी कम रखते हैं। इसके अलावा बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को टैक्स में भी कई तरह की छूट और रियायत भी दी जाती है। इसकी वजह से ये बड़ी कंपनियां तो लगातार व्यवसाय कर अपना लाभ बढ़ाती जाती हैं, लेकिन जिन देशों में वे कंपनियां काम करती हैं, उन देशों का टैक्स घाटा बढ़ता जाता है। 

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ऐसे में अगर जी-7 देशों के बीच ग्लोबल कॉरपोरेट टैक्स को लेकर बनी सहमति के आधार पर ग्लोबल पैक्ट तैयार हो जाता है, तो इससे बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को भी हर उस देश को न्यूनतम 15 फीसदी की दर से कॉरपोरेट टैक्स का भुगतान करना होगा, जहां वे कंपनियां अपना काम कर लाभ कमा रही होंगी। इस प्रावधान से दुनिया के गरीब और विकासशील देशों को भी काफी फायदा होगा।