एक वर्ष में खाद्य तेलों की कीमतों में रिकॉर्डतोड़ बढ़ोतरी

सरसों के रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद कीमतों में डबल उछाल

ज्योति दुबे
नवी मुंबई. कोरोना संक्रमण की वजह से लोग पहले से ही परेशान थे, लेकिन अब महंगाई की मार ने जीना मुहाल कर दिया है। इम्युनिटी के लिए सरसों और मूंगफली के तेल (oils) की मांग अधिक है, जिसके कारण इस वर्ष सरसों उत्पादन अधिक होने के बावजूद मांग के मुताबिक सप्लाई नहीं हो पा रही है। इसकी वजह से अब खाद्य तेल की कीमतें भी आसमान छू रही है। हालात ये हैं कि पिछले एक साल में खाद्य तेलों के दाम लगभग दोगुना बढ़ गए हैं।
एपीएमसी अनाज मंडी के व्यापारी के अनुसार पैक्ड खाद्य तेल जैसे सरसों, मूंगफली, सूरजमुखी, वनस्पति, सोया, और पाम ऑयल की मासिक औसत खुदरा कीमतें इस महीने, 11 साल बाद उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। पिछले एक वर्ष में खाद्य तेलों की कीमतों में दोगुना वृद्धि हुई हैं।उन्होंने बताया कि एक वर्ष पहले थोक मार्केट (wholesale market) में सोयाबीन तेल 70 रुपए के करीब था जो अब बढ़कर 148 रुपए किलो , सरसो तेल 90 से बढ़कर 180 रुपए किलो मूंगफली तेल 70 से 80 के करीब था वह बढ़कर 140 से 150 रुपए तक पहुंच गया हैं। कोरोना के मार के बीच खाद्य तेलों में हुई वृद्धि को लेकर लोगों को अब घर चलाने की चिंता सताने लगी है।


इम्युनिटी के लिए सरसों और मूंगफली तेल की मांग, टैक्स में कटौती करने से कीमतों में होगी कमी

अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने बताया कि भारत अपनी जरूरत का 70 फीसदी खाने का तेल अन्य देशों से आयात करता है, लेकिन कोरोना के दौरान मलेशिया और इंडोनेशिया से आने वाले पामतेल बंद हुए है इसके साथ ही इम्युनिटी के लिए सरसों और मूंगफली का तेल फायदेमंद होने के कारण लोगों ने पाम तेल और अन्य तेलों को नजरअंदाज कर सरसों और मूंगफली की तेल की मांग बढ़ी है, लेकिन इतने पैमाने पर प्रोडक्शन नहीं हो पा रहा है जिसके कारण भी कुछ मात्रा में तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल 26 मई को एक लीटर सरसों तेल का दाम 90 रुपए था। वह आज 190 रुपए के पास पहुंच गया है, बाजार में एक लीटर सरसों के तेल की बॉटल की रिटेल कीमत 200 रुपए के पास पहुंच गई हैं। बताया जा रहा है कि माल नहीं आने से दाम बढ़ रहे है। सरसों उत्तर प्रदेश और राजस्थान से आता है, लेकिन कोरोना और लॉकडाउन के कारण फिलहाल सरसों नहीं आ रहा है। इसका असर इसके दाम पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार अगर टैक्स घटाती है, तो कीमतों में कमी आ सकती है। इसके लिए हमने सरकार से आयत शुल्क कृषि कल्याण अधिभार में 35 प्रतिशत और जीएसटी में 5 प्रतिशत कटौती की मांग की है।

क्या कहते हैं खाद्य तेल कारोबारी
सरसों तेल का प्रोडक्शन करने वाले निर्मला ऑइल के मालिक सतीश चव्हाण ने बताया कि सरसों सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश से आती थीं इस वर्ष सरसो का उत्पादन अधिक हुआ है इसके बावजूद किसान और व्यापारियों के बिच दलाल ने सरसो को स्टॉक कर रख लिए है विशेष कर किसान आंदोलन के बाद यह देखा गया है इसके साथ ही कोरोना संक्रमण के कारण भी माल आ नहीं पा रहा है जिसके कारण भी एक तरह से कीमतों में बढ़ोतरी हुई है क्योकि सरसों तेल की मांग बढ़ने के बावजूद डिमांड पूरा नहीं हो पा रहा हैं।

खाद्य तेल की कीमतों की बढ़ोतरी से आम नागरिको ने जताई नाराजगी


शन्नू सिंह ने कहा है कि रसोई में तमाम पकवान बनते हैं। तेल के बढ़ते दामों का असर इनके किचन पर देखने को मिल रहा है। तली हुई चीजें हों या ज्यादा तेल इस्तेमाल कर बनाए जाने वाले पकवानों पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। गृहणियों का कहना है कि पहले कम कीमत होने के कारण काफी कुछ रसोई में बनता था, लेकिन अब बढ़े हुए दामों के कारण यह सीमित हो गया है। इसके लिए सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए

वहीं दीपक दुबे ने कहा है कि बढ़ती कीमत ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है पहले तो गैस की कीमतों ने बजट गड़बड़ा दिया था, लेकिन अब तो बढ़ते तेल की कीमत में भी खाने पर लगाम लगा दिया है और सरकार आम लोगों पर ध्यान भी नहीं दे रही है।

तेल की कीमत

तेल का नाम कीमत (2020) कीमत (2021)

पामोलिन 70 135
सोयाबीन 70 140
सरसों 90 170
मूंगफली 80 150