सांसदों के आवास के सामने फूंकी गईं कृषि कानून की प्रतियां

किसान आंदोलन एकजुटता मंच ने कहा- डा. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू की जाएं

आलोक गुप्ता
Prayagraj.
किसान आंदोलन एकजुटता मंच इलाहाबाद के तत्वावधान में आज कृषि कानूनों की प्रतियां जलाई गईं। मंच के पदाधिकारियों, सदस्यों ने सांसद केशरी देवी पटेल (MP Keshari Devi Patel) व प्रो. रीता जोशी बहुगुणा (Rita Joshi Bahuguna) के आवास के सामने विरोध प्रदर्शन किया और तीनों कानूनों को वापस लेने की मांग की गई।

संयुक्त किसान मोर्चा (United Kisan Morcha) के आह्वान पर प्रदर्शन कर रहे मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि देश के किसान डा. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू कराने की मांग कर रहे हैं। मौजूदा सरकार ने भी चुनावी घोषणापत्र में इसका वादा किया था। आयोग ने फसल की लागत (जमीन का किराया और अपने श्रम की मजदूरी समेत) का 1.5 गुना दाम देने की सिफारिश की थी, लेकिन मौजूदा समय में घोषित एमएसपी इन सिफारिशों के आधार पर फसल की लागत का 1.5 गुना नहीं होती है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि देश के अधिकांश हिस्सों में समुचित मात्रा में क्रय केंद्र उपलब्ध नहीं हैं। जहां पर क्रय केंद्र हैं भी, वहां की दिक्कतों, शर्तों के कारण किसानों को अपनी उपज व्यापारियों के हाथ बेचनी पड़ती है। इससे किसानों के समक्ष मौजूदा संकट और गहराता जा रहा है।

कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहा प्रदर्शन छह माह से चल रहा है। इसमें कई किसान काल-कवलित हो चुके हैं। पर, सरकार हठधर्मिता नहीं छोड़ रही है। खेती-किसानी चौपट होने से देश में बेरोजगारी अप्रत्याशित रूप से बढ़ेगी, साथ ही खरीद न होने के चलते राशन की व्यवस्था और चरमरा जाएगी। जमाखोरी के कानून के चलते खाद्य वस्तुओं की कीमतें इतनी बढ़ जाएगी कि मध्यम वर्ग के लिए भी दो वक्त की रोटी दुष्कर हो जाएगी। प्रदर्शनकारियों में डा. कमल उसरी, अखिल विकल्प, घनश्याम मौर्य, सुनील मौर्य, सोनू यादव, प्रदीप ओबामा, रवि मिश्र, राम सागर, डा. आशीष मित्तल, राजवेंद्र सिंह, सुभाष पटेल, सुभाष पांडेय, नसीम अंसारी आदि लोग शामिल रहे।