परिमार्जन

आज मराठी और भारतीय भाषाओं के महत्वपूर्ण कवि, गद्यकार, अनुवादक, संपादक सतीश कालसेकर नहीं रहे। भरे…

तुम्हें सौंपता हूँ

फूल मेरे जीवन में आ रहे हैं सौरभ से दसों दिशाएंभरी हुई हैंमेरा जी विह्वल हैमैं…

एकाग्र मन से

जो काम ज़रूरी थेउन्हें एहतियात सेअलगाता गया – कभी शान्तचित्त से,एकाग्र मन सेसमय से,सुविधा सेउन्हें अंजाम…

होना न होना

तुम नहीं थे तोपानी बहुत तंग करता थासब्जी कतरते समयइधर-उधर जो भीउंगली कट जाती थीउसमें बना…

मोर न होगा …उल्लू होंगे

ख़ूब तनी हो, ख़ूब अड़ी हो, ख़ूब लड़ी होप्रजातंत्र को कौन पूछता, तुम्हीं बड़ी हो डर…

कविता : मैं क्यों पूछूं

मैं क्यों पूछूं यह विरह-निशा,कितनी बीती क्या शेष रही? उर का दीपक चिर, स्नेह अतल,सुधि-लौ शत…

चलते समय

तुम मुझे पूछते हो ‘जाऊं?मैं क्या जवाब दूं तुम्हीं कहो!‘जा…’ कहते रुकती है जबानकिस मुंह से…

प्रेरक प्रसंग : शिव की गंगा

एक समय शंकर भगवान पार्वतीजी के साथ हरिद्वार में घूम रहे थे । पार्वती जी ने…

Poem : सपने लो सपने लो

सपने लो सपने लोमीठे मीठे सपनेअच्छे अच्छे सपनेअपने मन के सपनेसपने लो सपनों से ही मेरी…

Poem : किसी को ठीक ठीक जानना हो तो

किसी को ठीक ठीक जानना हो तो पता करोवह आलोचना किसकी करता है। किसी सरकार को…

ये दिया कैसे जलता रह गया

आप को देख कर देखता रह गयाक्या कहुँ और कहने को क्या रह गया आते आते…

नई आवाज

कभी की जा चुकीं नीचे यहाँ की वेदनाएँ,नए स्वर के लिए तू क्या गगन को छानता…

प्यार

मां को बहुत प्यार करते थे पिताइतनाकि वह हमेशा बंधी रहीं उनसेहर बात पर ख़्याल रखती…

प्रतिध्वनि

सुने वन-जंगल में कोई रोये-चीखे जब हैवानगूंज उठे यदि तुरही कोई या आये भारी तूफ़ानकहीं किसी…

अगर चांद मर जाता

खोजते सौन्दर्य नया?देखते क्या दुनिया को?रहते क्या, रहते हैंजैसे मनुष्य सब?क्या करते कविगण तब? प्रेमियों का…

अभिशप्त

पर्वत न हुआ, निर्झर न हुआसरिता न हुआ, सागर न हुआ,क़िस्मत कैसी ! लेकर आयाजंगल न हुआ,…

मैं खड़ा रहा वैसे ही

मन की धूपकब की भटक गई अनजान गलियों मेंमन का हाहाकार स्तब्धभीतर-भीतर कंठ दाब दियाबाहर यह…

क्या हुआ यदि

तो क्या हुआ यदि मैं जगत में रह गया अपदार्थराष्ट्र के, संसार के, परिवार के कुछ…

चाव तो हर क्षण जगे

घाव तो अनगिन लगेकुछ भरे, कुछ रिसते रहे,पर बान चलने की नहीं छूटी !चाव तो हर क्षण…

पेट अगर सच मुच फट जाता

आज रात बिस्तर में लेटेसोचा मैंने ध्यान लगाकर,कितने रंग की चीजें खाईंमैंने दिन भर मंगा-मंगाकर।श्वेत रंग…

पूरी भई तब क्यों तोलै

मन मस्त हुआ तब क्यों बोलै।हीरा पायो गांठ गंठियायो, बार-बार वाको क्यों खोलै।हलकी थी तब चढी…

आग लगे बरि जाना है

रहना नहिं देस बिराना है।यह संसार कागद की पुडिया, बूंद पडे गलि जाना है।यह संसार कांटे…

जीने के इज़हार न मांगो

यारो किसी क़ातिल से कभी प्यार न मांगोअपने ही गले के लिये तलवार न मांगो गिर…

कारण

दु:ख जब तक हृदय में थाथा बर्फ़ की तरहपिघला तो उमड़ा आंसू बनकरगिरा तो जल की…

कविता : नहीं आने के लिए कह कर

नहीं आने के लिए कह कर जाऊंगाऔर फिर आ जाऊंगापवन से, पानी से, पहाड़ सेकहूंगा– नहीं…

गर्मी के फल

काली घटा गगन में छाई मंद हुआ भूतल पर तापरिमझिम रिमझिम पानी बरसा इधर उधर है…

कांच पिंजरा

टूटा प्रेम भरोसा मेराकांच पिंजरा प्यार तेरा प्यार हुआ पंख उगेउड़ने केे अरमान जगेतुम्हारे हौसले पे…

पाए हुए इस वक़्त को खोना ही बहुत है

पाए हुए इस वक़्त को खोना ही बहुत हैनींद आए तो इस हाल में सोना ही…

ख़ामुशी अच्छी नहीं इंकार होना चाहिए

ख़ामुशी अच्छी नहीं इंकार होना चाहिएये तमाशा अब सर-ए-बाज़ार होना चाहिए ख़्वाब की ताबीर पर इसरार…

नींद में हो रही है बारिश

ख़्वाब सच हों, है हंसी हर चन्द कोशिशनींद ही में हो रही है कहीं बारिशरात, काली…

बारिश आने से पहले

बारिश आने से पहलेबारिश से बचने की तैयारी जारी हैसारी दरारें बन्द कर ली हैंऔर लीप…

बारिश हो रही है

बारिश हो रही हैतुम बार-बार देखती हो आकाशचमकती हुई बिजली को देखकरचिहुंक उठती हो जितने भूरे-भूरे…

बारिश में क्या तन्हा भीगना लड़की!

बारिश में क्या तन्हा भीगना लड़की!उसे बुला जिसकी चाहत मेंतेरा तन-मन भीगा हैप्यार की बारिश से…

बादल घिर आए, गीत की बेला आई

बादल घिर आए, गीत की बेला आई।आज गगन की सूनी छातीभावों से भर आई,चपला के पावों…

घर की याद

आज पानी गिर रहा है,बहुत पानी गिर रहा है,रात-भर गिरता रहा है,प्राण मन घिरता रहा है,…

फिर देर तक बारिश हुई

शाम को इंजीर के पत्तों के पीछेएक सरगोशी बरहना पांवइतनी तेज दौड़ीमेरा दम घुटने लगारेत जैसे…

क‍व‍िता : इस उदास बारिश की

बारिश दिन ढले कीहरियाली-भीगी, बेबस, गुमसुमतुम हो और,और वही बलखाई मुद्राकोमल शंखवाले गले कीवही झुकी-मुँदी पलक…

कव‍िता : जब वर्षा शुरू होती है

जब वर्षा शुरू होती हैकबूतर उड़ना बन्द कर देते हैंगली कुछ दूर तक भागती हुई जाती…

बारिश की बूंदें

गर्मियों से मुग्ध थी धरतीपर बारिश की बूंदें पड़ते हीतुम बुदबुदाईंबारिश कितनी ख़ूबसूरत है ! क्या तुम्हारा…

मेरी सांसों पर मेघ उतरने लगे हैं

मेरी सांसों पर मेघ उतरने लगे हैं,आकाश पलकों पर झुक आया है,क्षितिज मेरी भुजाओं में टकराता…

पर डोनेट नहीं करते

हम ख़ूनबहाते हैंजलाते हैंखौलाते हैंपर डोनेट नहीं करतेक्यों?क्योंकि…ख़ूनबहानेजलानेखौलानेके पहले हम इतना नहीं सोचतेजितना डोनेट करने के…

अभी तक बारिश नहीं हुई

अभी तक बारिश नहीं हुईवाली झोंपड़ी और बौना पहाड़।अभी तक बारिश नहीं हुईओह! घर के सामने…

बादल भिगो गए रातों रात

मानसून उतरा हैजहरी खाल की पहाड़ियों परबादल भिगो गए रातोंरातसलेटी छतों केकच्चे-पक्के घरों कोप्रमुदित हैं गिरिजनसोंधी…

कविता : आषाढ़ का दिन

झाड़ों का गिर पड़नाकहीं गरजन का जाकर दूर सिर के पास फिर पड़नाउमड़ती नदी का खेती…

बारिश के बारे में सोचना

अंधेरी रात में सड़कों परदूधिया बारिश हो रही हैऔरलोग अपने-अपने बिस्तरों परलिहाफ़ों में दुबकेनींद आने से…