डॉ. अमरपुरकर की मौत के लिए बीएमसी प्रशासन जिम्मेदार : भालचंद्र शिरसाट

आईजीआर संवाददाता
मुंबई.
स्थायी समिति के सदस्य भालचंद्र शिरसाट (Bhalchandra Shirsat) ने बुधवार को उनकी मृत्यु में देरी और निष्क्रियता के लिए मनपा और प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि बीएमसी प्रशासन की लापरवाही के कारण क्लीवलैंड पोर्ट (Port of Cleveland) में बाढ़ गेट को बदलने में छह साल देरी लगी। इससे प्रभादेवी, दीपक टॉकीज, एलफिस्टन रोड, सेनापति बापट में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई। 29 अगस्त, 2017 को भारी बारिश के कारण और ज्वार के कारण बाढ़ के फाटकों को बंद नहीं किया जा सका। इसलिए समुद्र का पानी शहर में भर गया। इस पानी को निकालने के लिए मनपा के कर्मचारियों ने मैनहोल का ढक्कन खोल दिया। इस खुले मैनहोल में फिसलने के बाद डॉ. अमरपुरकर का दुर्भाग्यपूर्ण अंत हुआ। उनका शव अगले दिन क्लीवलैंड के बाहर पाया गया था।

पानी को समुद्र में जाने से रोकने के लिए बनाए गए फ्लड गेट ब्रिटिश काल के हैं और उनकी उम्र खत्म हो चुकी है। भारी बारिश के कारण गेट को ठीक से बंद नहीं किया जा सका और समुद्र का पानी अंदर आ गया और इलाके में पानी भर गया। इस दौरान डॉ. अमरपुरकर की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो गई। फ्लड गेट फेल होने के बाद भी प्रशासन ने इसमें छह साल की देरी की। अगर समय रहते फ्लड गेट की मरम्मत कर दी जाती तो डॉ. अमरपुरकर (Dr. Amarpurkar) की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने इसके लिए निष्क्रिय मनपा प्रशासन और उदासीन अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया।क्लीवलैंड के बंदरगाह पर काम के लिए निविदा वर्तमान में स्थायी समिति के पास है और इसे पूरा होने में कम से कम छह महीने लगेंगे। तो इस काम का लाभ इस साल के बरसात के मौसम में नहीं होगा। तो इस बरसात के मौसम में प्रशासन क्या करेगा? भाजपा के नेता प्रभाकर शिंदे (Prabhakr Shinde ) के यह पूछे जाने पर कि प्रशासन ने इस प्रस्ताव को पेश करने में देरी क्यों की।