भिवंडी की बिल्डर और ठेकेदार लॉबी ने फिर नौवीं बार उड़ाई आयुक्त के तबादले की अफवाह

मुनीर अहमद मोमिन
Bhiwandi
. यहां की बिल्डर लॉबी ने एक ठेकेदार कंपनी से मिलकर पिछले एक सप्ताह से शहर में जबरदस्त अफवाह उड़ा रखी थी कि भिवंडी मनपा आयुक्त डा. पंकज आशिया (Bhiwandi Municipal Commissioner Dr. Pankaj Ashiya) का तबादला हो गया है अथवा होने वाला है। हालांकि इस तबादले की अफवाह बाबत जहां स्वंय मनपा आयुक्त डा. पंकज आशिया ने 1 जून को ही ‘इंडिया ग्राउंड रिपोर्ट‘ से एक निजी बातचीत में इसका खंडन किया था। वहीं आज मनपा प्रशासन ने भी जनसंपर्क (PRO)अधिकारी मिलिंद पलसुले के जरिए एक संक्षिप्त प्रेस बयान जारी कर बताया है कि आयुक्त डा. पंकज आशिया के तबादले बाबत फैलाई जा रही ख़बरें महज अफवाह है। मनपा द्वारा जारी इस बयान से अफवाह फैलाने वाले गिरोह की तिकड़म बाजी एक बार फिर धाराशाई हो गई है।

यहां इस बात का उल्लेख अति आवश्यक है कि इसी तरह उक्त ठेकेदार कंपनी, बिल्डर लॉबी (contractor company, builder lobby)और यहां के कुछ नगरसेवकों के गठजोड़ का नजारा उस दिन देखने को मिला था। जिस दिन देर शाम मनपा के तत्कालीन आयुक्त योगेश के तबादले का आदेश जारी हुआ था। उस दिन उक्त ठेकेदार, बिल्डर लॉबी के कुछ लोग और कुछ नगरसेवक मेयर की आफिस में फूलहार और मिठाई का डिब्बा लेकर दोपहर से ही बैठे थे। यानि उन्हें मालूम था कि आज योगेश म्हसे का तबादला होगा ही होगा। क्योंकि उन्होंने पहले से ही तत्कालीन नगरविकास सचिव (Urban Development Secretary) और राज्य के सबसे ताकतवर मंत्री से तबादले की पहले से ही टेंडरिंग कर रखा था। अभी हाल फिलहाल मानसून आने और शहर की अवैध इमारतों की सूची जारी होने के बाद ठेकेदार कंपनी सहित यहां की बिल्डर लॉबी फिर बुरी तरह बेचैन हो उठी है। क्योंकि ठेकेदार कंपनी ने भूमिगत गटर के लिए जगह-जगह सड़क खोदकर शहर के अधिकांश हिस्सों को साक्षात नर्क बना रखा है। बरसात के दौरान विगत 3-4 वर्षों से हालात और बदतर हो जाते हैं। जिससे उस पर काम करने का दबाव बढ़ जाता है। इसलिए मानसून में आने वाले दबाव को कम करने के लिए और बिल्डर लॉबी के दिलासे के लिए तबादले का शगूफा छोड़ा गया है।
मालूम हो कि भिवंडी आने से पहले डा. आशिया को मालेगांव में कोरोना पर नियंत्रण के लिए भेजा गया था। जहां इन्होने आपात आपरेशन सेंटर बनाकर विभिन्न विभागीय अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपकर कोरोना पर काबू पाने में सफलता पाई थी।इधर भिवंडी में भी दिनोंदिन कोरोना के मरीजों और उससे होने वाली मौतों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर आम जनता की ओर से किसी आईएएस (IAS) आयुक्त की मांग तेज होने लगी थी। जिसके बाद राज्य सरकार ने मालेगांव में इनके बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए इन्हें भिवंडी मनपा का आयुक्त नियुक्त किया था। जिससे भिवंडी के नागरिकों में एक नई आस जगी थी कि अब उन्हें भ्रष्टाचार और कोरोना दोनों से बहुत जल्द मुक्ति मिलेगी और शनैः शनैः मिलने भी लगी है।

मालूम हो कि आल इंडिया में 29वां रैंक पाने वाले 2016 के बैच के महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अधिकारी डा. पंकज आशिया ने शनिवार को देर शाम 20 जून 2020 को भिवंडी मनपा की कमान संभाली थी और अपने कुशल नेतृत्व और अनूठी कार्यशैली के बल पर कोरोना पर काबू पाने पर शत-प्रतिशत कामयाब रहने के अलावा मनपा की बुरी तरह छिन्न-भिन्न हो चली प्रशासनिक कार्य प्रणाली को चुस्त दुरूस्त बनाते हुए भ्रष्टाचार पर पूर्ण विराम लगाने सहित मनपाकर्मियों को भी अनुशासित किया। इस दौरान एक बात यह हुई की भिवंडी मनपा की कथित टॉप टेन मंडली की मनमानी और दुकानदारी पर पूरी तरह ब्रेक लग गया। तबसे ठेकेदार कंपनी, बिल्डरलॉबी और उनके भागीदार राजनेताओं और जन प्रतिनिधियों के गठजोड़ समय-समय पर लगभग सवा 11 महीने में 9 बार बहुत सुनियोजित ढ़ंग से यह अफवाह उड़वाने लगा की डा. आशिया का ट्रांसफर हो गया या होने वाला है। अभी फिलहाल हफ्ते भर से तबादले की अफवाह पुनः चरम पर थी।

लेकिन भरोसेमंद सूत्रों का दावा है कि सरकार कोरोना जैसे संकट काल में डा. आशिया के तबादले जैसा आत्मघाती रिस्क लेने के मूड में कत्तई नहीं दिख रही है। हालांकि यह बात भी उतनी ही सच है कि ग्रेड के हिसाब से भिवंडी मनपा की पोस्ट जूनियर है और फ्रेश आईएएस स्तर के अधिकारी के लिए नहीं है। दूसरी बात यह है कि डा. पंकज आशिया को प्रशासनिक कार्य प्रणाली के नियमानुसार आईएएस अधिकारी को जिलाधिकारी बनने से पूर्व शहर और जिला परिषद दोनों का अनुभव प्राप्त करना आवश्यक होता है। लेकिन अभी तक डा. आशिया ने जिला परिषद नहीं किया है और जब तक ये जिला परिषद नहीं करेंगे। तब तक जिलाधिकारी नहीं बनेगें। डा. आशिया के करीबी सूत्रों का मानना है कि वैसे भिवंडी में रहने की उनकी खुद की इच्छा नहीं है। क्योंकि उनके कैरियर का नुकसान हो रहा है। यहां आने के कारण वह अपने अन्य बैचमेट भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों से जिलाधिकारी बनने के मामले में एक-डेढ़ साल पिछड़ गए हैं।

मौजूदा समय में जिस ढंग से उन्होंने कोरोना महामारी सहित मनपा की अंदरूनी प्रशासनिक बीमारियों की सफलतम सर्जरी करने के साथ-साथ मनपा का खजाना लूट पिट कर खाली होने के बावजूद अपनी कूटनीतिज्ञ प्रतिभा के बल पर उन्होंने घेर घारकर को शहर को विकास पथ पर लाने की जद्दोजहद करते नजर आ रहे हैं और इसमें काफी हद तक वे कामयाब होते भी दिख रहे हैं। आम शहरियों सहित मनपा कर्मियों में भी उनके प्रति आदर और सम्मान देखा जा रहा है। ऐसे समय में उनको अवार्ड देने के बदले ऐसा नहीं लगता कि सूबे के सीएम तबादला देंगे। उल्लेखनीय है कि डी अथवा बी श्रेणी की महानगरपालिका में फ्रेश अथवा डायरेक्ट आईएएस नहीं आते। लेकिन कोविड काल के चलते सरकार ने इन्हें यहां भेजा है। भिवंडी मनपा के सूत्रों ने ‘इंडिया ग्राउंड रिपोर्ट’ को बताया कि निचले कर्मचारियों पर मानसिक दबाव बनाने के लिए यह अफवाहें इसलिए प्लांट की जाती हैं कि अब तो आयुक्त जाने वाले हैं। इसलिए हमारी सुनो और हमारे इशारे पर काम करो