नाराज हैं पुलिसकर्मी : लगायी बराबर भत्ते की गुहार

आईजीआर संवाददाता
Thane.
चुनाव कार्य में लगे सरकारी कर्मचारियों और पुलिस कर्मियों के भत्तों में भारी अंतर है। एक ओर जहां एक सामान्य सिपाही को 1,100 रुपए का भत्ता दिया जा रहा है, वहीं पुलिसवालों को केवल 300 रुपए भत्ते के तौर पर दिया जा रहा है। इसे लेकर उपमुख्यमंत्री अजीत पवार (Deputy Chief Minister Ajit Pawar), गृह मंत्री दिलीप वलसे-पाटिल और राकांपा के प्रइंडिया ग्राउंड रिपोर्टदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल को भेजे ज्ञापन में मनपा के पूर्व स्वीकृत सदस्य नंदकुमार फूटाणे ने मांग की कि इस विसंगति को दूर कर पुलिस का चुनावी भत्ता बढ़ाया जाए।
नंदकुमार फूटाणे (Nandkumar Futane) द्वारा दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि राज्य में ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद, नगर परिषद, नगरपालिका, महानगर पालिका, विधानसभा, लोकसभा व अन्य महामंडलों के चुनाव कार्यक्रमों में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ पुलिस कर्मियों की नियुक्ति की जाती है। मतदान के एक दिन पहले और मतदान के दिन सरकारी कर्मचारियों के साथ पुलिस कर्मी मतदान केंद्र पर पूर्णकालिक ड्यूटी पर तैनात रहते हैं।

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मतदान केंद्र पर शांति व सुरक्षा और किसी भी अनियमितता को रोकते हुए शांतिपूर्ण तरीके से मतदान संपन्न कराना पुलिस कर्मियों की भी जिम्मेदारी होती है। इन पुलिसकर्मियों को केवल 300 रुपए और मतदान केंद्र पर चपरासी को 1100 रुपये का भुगतान भत्ते के रूप में किया जाता है। चपरासियों और पुलिस कर्मियों को दिए जाने वाले मतदान भत्ते में जो बड़ा अंतर है वह गलत है। इससे पुलिस कर्मियों में आक्रोश है। हालांकि हकीकत यह है कि पुलिस कर्मी इस सरकारी व्यवस्था पर नियमानुसार सवाल नहीं उठा सकते। इसलिए मतदान केंद्र पर भुगतान की जाने वाली भत्ते की राशि में चपरासियों और पुलिस के बीच असमानता ने पुलिसकर्मियों को नाराज कर दिया है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि इस नाराजगी का मतदान केंद्र के कामकाज पर नकारात्मक असर पड़ेगा। इसी को ध्यान में रखते हुए फूटाणे ने मांग की है कि पुलिस को भी अन्य कर्मचारियों के समान भत्ता दिया जाए।