टोक्यो ओलंपिक में दम दिखाने को तैयार अमेरिकी एथलीट

Tokyo. ओलंपिक खेल हों, और इन खेलों की पदक तालिका में पहले स्थान के लिए अमेरिका अपनी पूरी शक्ति न झौंक दे, ऐसा हो ही नहीं सकता। इस बार भले ही उसे रियो डी जेनेरियो खेलों की तरह एक बार फिर टोक्यो ओलंपिक में चीन के एथलीटों से कड़ी टक्कर का सामना करना पड़े, अमेरिका के दर्जन भर खेल सितारों पर भारत सहित दुनिया भर के दो अरब दर्शकों की निगाहें होंगी। क्या कोई खेलप्रेमी ओलंपिक की ढेरों पदक वाली तीन मूल प्रतिस्पर्धाओं-जिमनास्टिक, तैराकी और ट्रैक एवं फ़ील्ड में टूटते बनते नए कीर्तिमानों को नज़रंदाज कर पाएगा? अमेरिका ने इन्हीं तीनो प्रतिस्पर्धाओं में ढेरों पदक जीत कर ब्राज़ील के रियो में 46 स्वर्ण, 37 रजत और 38 कांस्य पदक जीत कर ,चीन (26-18-26 कुल 70) को पदक तालिका में बहुत पीछे छोड़ दिया था।

रियो ओलंपिक में ब्रिटेन (67) और रूस (56 )क्रमश: तीसरे और चौथे स्थान पर रहे थे। रूसी एथलीट डोपिंग आरोपों में घिरे होने के कारण दंड स्वरूप ओलंपिक ध्वज के नीचे खेलेंगे, लेकिन वे अपने देश की पहचान बनाए रखने के लिए ड्रेस के रंग बरक़रार रख पाएँगे।

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अमेरिका के चंद ऐसे ही सितारों की बात करें, तो अश्वेत सिमोन बाइल्स एक जिमनास्टिक के इतिहास में एक बेजोड़ जगमगाती सितारा है। दावा है कि सिमोन बाइल्स ने टोक्यो में जिमनास्टिक की ‘बार’ प्रतिस्पर्धा में बार की ऊँचाई इतनी तय करने का मन बनाया है कि दुनिया की कोई महिला जिमनास्ट उस तक पहुँच ही नहीं पाए। इसके लिए सिमोन ने अपनी असीम ऊर्जा और गति के साथ शारीरिक चपलता को ऐसा साधा है कि प्रतिस्पर्धी जिमनास्ट उसके लक्ष्य को भेद ही नहीं पाए।

पिछली मई में सिमोन ने वाल्ट स्पर्धा में तकनीकी तौर पर यह सिद्ध कर दिया था कि वह तकनीक में अद्वितीय है। रियो में सिमोन बाइल्स ने अपनी चार स्पर्धाओं-आल राउंड, टीम वाल्ट और बार में चार स्वर्ण पदक जीते थे। पिछले 53 वर्ष के इतिहास में एक बार फिर वह नादिया के आल राउंड रिकार्ड की बराबरी कर लेगी। सिमोन बाइल्स की टीम में सुनिसा ली भी एक ऐसी महिला जिमनास्ट हैं, जिसका अनइवन बार में कोई सानी नहीं है। एक साल पहले 18 वर्षीय सुनिसा ने नेशनल में टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक के साथ वैयक्तिक और फ़्लोर एक्सरसाइज़ में रजत एवं अनइवन में कांस्य जीते थे, जबकि उसके पिता मात्र कुछ दिन पूर्व अपनी रीढ़ की हड्डी तुड़वा कर घर लौटे थे।