जैन धर्म और स‍िद्धांत : समय का भरोसा नहीं, जो करना है अभी करें

जय ज‍िनेंद्र दोस्तो

आप सब ने यह बात तो सुनी ही होगी कि काल करें सो आज कर आज करें सो अब। पल में परलय होए है बहुरि करेगा कब।।आप सोच रहे होंगे कि ये बात कहां से आई होगी, तो मैं आपको बता रहा हूं कि  यह दुन‍िया की सबसे महत्‍वपूर्ण बात है। बस हम इस पर ध्‍यान नहीं देते।

Home » Blog » जैन धर्म और स‍िद्धांत : समय का भरोसा नहीं, जो करना है अभी करें

अगर हम बात करें जैन धर्म के सिध्दांतों की तो इनमें से अत्‍यंत महत्‍वपर्ण यह भी है। यह बात एक द्रव्य, गुण और पर्याय से आई है। अब पहले हम समझ लेते हैं कि यह द्रव्य, गुण और पर्याय है। सबसे पहले देखते हैं, द्रव्य किसे कहते हैं। इसका उत्तर है गुणों के समूह को द्रव्य कहते हैं, जैसे आम है वह एक द्रव्य है और उसके अंदर अनेक गुण हैं। जैसे उसका रस, रूप, आकर आदि उसी तरह हम भी जीव द्रव्य हैं और हमारे अंदर अनंत गुण हैं। अब देखते हैं गुण क्या है, तो जो द्रव्य के सभी भाग में और उसकी सभी अवस्था में पाया जाए वह है गुण। जैसे कच्चा आम है, वह हर जगह से खट्टा ही होता है। अगर हम उसका अमचूर भी बना लें तो वह भी हमे खटास ही देता है। अब यह सोचें क‍ि पर्याय क्या है, तो गुणों के पर‍िवर्तन को पर्याय कहते हैं। जैसे जब आम खट्टा होता है, हरा होता है, तो हम कच्चा कह देते हैं, और जब वही पक जाता है, पीला हो जाता है, तो उसे हम पका आम कहते हैं।

तो अभी हमने द्रव्य गुण पर्याय की जानकारी ली अब हम देखते है कि इसकी जीवन में क्या उपयोगिता है। हम सबने सुना है कि आत्मा अजर अमर है, त्रैकालिक है, जिसका कभी नाश नहीं होता। यह बात द्रव्य और गुण के आधार पर ही कही जाती है। क्योंकि द्रव्य का और गुणों का कभी नाश नहीं होता, परंतु जो पर्याय है, वह प्रतिसमय बदलता रहता है। अर्थार्त ये जो हमारा शरीर है वह नश्वर है, उसका कोई भरोसा नहीं है। हमारी सांस का भरोसा नहीं है कि कौन-सी सांस आखिरी हो। इसलिए जब हमारे पास इतना सब कुछ साधन उपलब्ध है, तो हमें इसका उपयोग अपने आत्महित में करना चाहिए न कि समय के भरोसे बैठे रहें।

इसे एक उदाहरण से समझते हैं-

एक बार की बात है महाराज युधिष्ठिर की राज्यसभा लगी हुई थी। सभी मंत्रीगण और उनके सभी भाई सभा में विराजमान थे पूरी सभा खचाखच भारी हुई थी। तब अचानक एक गरीब व्यक्ति आया और उसने अपनी दीनता महाराज युधिष्ठिर को सुनाने की प्रार्थना की तब महाराज युधिष्ठिर ने कहा कि आप कल आना में कल आपकी बात सुन लूंगा और इतना कहकर वे शांत हो गए। लेकिन जैसे ही वे शांत हुए, तो उनका छोटा भाई भीम जोर-जोर से चिल्लाना लगा कि काल विजयी महाराज युधिष्ठिर की जय हो, तीनों काल के ज्ञाता महाराज युधिष्ठिर की जय हो, कालजयी महाराज युधिष्ठिर की जय हो, जय हो… जय हो… भीम की इस तरह प्रतिक्रिया को देखकर महाराज युधिष्ठिर ने कहा कि भाई तुम ऐसा क्यों कह रहे हो! भला आज तक कोई काल को जीत पाया है?

तब भीम ने उत्तर दिया कि महाराज आपने जीत लिया है काल को। ऐसा उत्तर सुनकर युधिष्ठिर ने फिर पूछा ये तुम क्या कह रहे हो भला कोई काल को भी जीत सकता है? तब भीम ने समझाया कि महाराज आपने अभी उस गरीब व्यक्ति से कहा कि कल आना इसका मतलब आपको ज्ञात है कि कल तक आप जीवित रहने वाले हैं, वह व्यक्ति जीवित रहने वाला है, और ये सभा भी कल इसी तरह लगने वाली है। इसलिए आप कालजयी हैं आपको सब कुछ ज्ञात है। तब महाराज युधिष्ठिर को बात समझ आई, और उन्होंने उसी समय उस व्यक्ति की बात को सुना और उसका निराकरण किया।

दोस्तों बस यही है इस द्रव्य गुण पर्याय को समझने का लाभ क‍ि हमें पता है, मैं अजर अमर अविनाशी तत्व हूं, लेकिन ये शरीर है वह नाशवान है। और एक बार अगर ये नष्ट हो गया, तो दोबारा प्राप्त करना महादुर्लभ है। अतः हम द्रव्य गुण पर्याय को समझें और इसे समझकर अपना हित करें। यही हमारे लिए कार्यकारी है और इसी मंगल भावना से मैं विराम लेता हूं।

मो‍ह‍ित जैन

शिक्षक, अधीक्षक,  स्‍वतंत्र लेखन,

मध्यप्रदेश में न‍िवास.