अडाणी एयरपोर्ट बनेगी अलग कंपनी, जल्द आईपीओ लाने की तैयारी

New Delhi. एशिया के दूसरे सबसे धनी कारोबारी गौतम अडाणी अपने एयरपोर्ट बिजनेस इंडिपेंडेंट कंपनी के रूप में लाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए ग्रुप की होल्डिंग कंपनी अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) से एयपोर्ट बिजनेस को अलग करके इंडिपेंडेंट कंपनी के रूप में शेयर बाजार में लिस्ट करने की योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि अडाणी एयरपोर्ट के नाम से इन कंपनी का आईपीओ लाने के लिए इन्वेस्टमेंट बैंकर्स से कई दौर की बातचीत की जा चुकी है। अडाणी ग्रुप की छह कंपनियां पहले से ही स्टॉक मार्केट में लिस्टेड हैं, जिनका मार्केट कैप 8.5 लाख करोड़ रुपये का है। अडाणी ग्रुप को अडाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स में शेयरों के प्राइवेट प्लेसमेंट से करीब 50 करोड़ों डॉलर जुटा लेने की उम्मीद है। प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए पैसे जुटाने के बाद कंपनी का आईपीओ लाया जाएगा। अडाणी समूह का इरादा इस आईपीओ के जरिए 25 से लेकर 29 हजार करोड़ रुपये की राशि जुटाने का है। अडाणी ग्रुप अपने एयरपोर्ट बिजनेस के वैल्यूएशन को कम से कम 25,500 करोड़ रुपये तक पहुंचाना चाहता है। 

मौजूदा वित्त वर्ष में अडाणी ग्रुप में एयरपोर्ट बिजनेस के विस्तार के लिए प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए भारी-भरकम राशि आएगी, जिससे आईपीओ लाने के पहले ही एयरपोर्ट बिजनेस को और बढ़ाया जा सके। कंपनी का इरादा अगले कुछ सालों में एयरपोर्ट बिजनेस पर लगभग 30,000 करोड रुपये के निवेश करने का है। 

साल 2019 में एयरपोर्ट बिजनेस शुरू करने के बाद से अडाणी ग्रुप ने काफी तेज तरक्की की है। ग्रुप की कंपनी अडाणी एयरपोर्ट्स को 50 साल की अवधि के लिए अहमदाबाद, लखनऊ, जयपुर, गुवाहाटी, मंगलुरू और तिरुअनंतपुरम के एयरपोर्ट अलॉट किए गए हैं। अडाणी एयरपोर्ट्स को इन छह हवाई अड्डों के आधुनिकीकरण करने और उन्हें ऑपरेट करने का काम दिया गया है। 

इसके अलावा पिछले साल अगस्त में ही अडाणी एयरपोर्ट्स ने मुंबई इंटरनेशलन एयरपोर्ट (एमआईएएल) में भी 74 फीसदी की हिस्सेदारी खरीद ली थी। एमआईएएल को ही नवी मुंबई में बनने वाला नया एयरपोर्ट अलॉट किया गया है। इस तरह अडाणी एयरपोर्ट्स ने एमआईएएल की 74 फीसदी हिस्सेदारी खरीदकर नवी मुंबई एयरपोर्ट का अलॉटमेंट भी परोक्ष तरीके से हासिल कर लिया है। इसी ऑफेंसिव मार्केटिंग के बल पर बहुत कम समय में ही अडाणी ग्रुप ने देश के एयरपोर्ट बिजनेस में एयर ट्रैवल के यात्रियों के मामले में 10 फीसदी की हिस्सेदारी पर कब्जा कर लिया है। 

जानकारों का कहना है कि एयरपोर्ट बिजनेस को अलग करके उसकी लिस्टिंग कराने के लिए ग्रुप के आला अधिकारियों की इन्वेस्टमेंट बैंकर्स के साथ कई दौर की चर्चा भी हो चुकी है। हालांकी अडाणी ग्रुप अभी एयर पैसेंजर की संख्या में और बढ़ोतरी होने का इंतजार कर रहा है ताकि आईपीओ होने की स्थिति में उसे अच्छा रिस्पांस मिल सके। कोरोना संकट शुरू होने के बाद से ही लगाए गए प्रतिबंधों और कोरोना प्रोटोकॉल की वजह से एयर पैसेंजर्स की संख्या में पिछले एक साल के दौरान काफी कमी आई है। ऐसे में अडाणी ग्रुप की योजना एयरपोर्ट्स की गतिविधियां के पहले वाले ढर्रे पर लौट आने तक के लिए कुछ और समय तक इंतजार करने की है।