भिवंडी मनपा में सक्षम अधिकारियों के 63 पदों सहित कुल 839 पद पड़े हैं खाली

मुनीर अहमद मोमिन
Bhiwandi
. मनपा में सक्षम अधिकारियों के न होने सहित मंजूर पदों में से 839 पद (Post) खाली होने के कारण शहर विकास पर विपरीत प्रभाव पड़ने सहित जहां भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी होती जा रही हैं। वहीं मौजूदा महामारी कोरोना (epidemic corona) के नियंत्रण में भी दुश्वारी पेश हुई थी। इस तरह राज्य सरकार की उदासीनता के चलते पूरा शहर लिपिकों और चपरासियों के हवाले हो गया है। क्योंकि रिक्त पदों पर उन्हें ही प्रभारी बनाकर काम चलाया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ भिवंडी मनपा (Bhiwandi Municipal Corporation) में प्रथम वर्ग के लिए 32 मंजूर पदों में केवल 10 ही कार्यरत हैं। बाकी 22 पद रिक्त हैं। द्वितीय वर्ग के लिए 50 मंजूर पदों में केवल 9 लोग ही कार्यरत हैं बाकी 41 पद रिक्त है। तृतीय वर्ग के लिए भी मंजूर 1109 पदों में केवल 595 ही कार्यरत हैं तथा 514 पद खाली हैं। इसी तरह चतुर्थ श्रेणी के लिए भी मंजूर 646 पदों के बदले 484 ही कार्यरत हैं और बाकी 162 पद खाली हैं। जिसमें 18 सफाई मुकादम, 82 सफाई कामगार का भी रिक्त पद शामिल है। इस तरह कुल मिलाकर 4362 मंजूर पदों की जगह केवल 3523 लोग ही यहां कार्यरत हैं। बाकी 839 पद वर्षों से खाली पड़े हैं।

(यह भी पढ़े: ईरान की तेल रिफाइनरी में गैस पाइपलाइन में रिसाव से लगी आग)

क्लर्कों और सफाई कर्मियों के हाथ में भिवंडी मनपा की बागडोर
उल्लेखनीय है कि मनपा प्रशासन की रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण वर्ग एक और दो के अधिकारियों की भारी किल्लत है। क्योंकि इस दोनों वर्ग में कुल 82 अधिकारियों के बदले केवल 19 अधिकारियों से ही काम चलाया जा रहा है। इतना ही नहीं लगभग 50 फीसदी लिपिक बरास्ता सफाई कर्मी मनपा में आते हैं। इनमें से कई तो मनपा के महत्वपूर्ण विभागों के प्रभारी तक हैं। सबसे अचरज की बात तो यह है कि यहां के ज्यादातर प्रभाग अधिकारी (सहायक आयुक्त) भी क्लर्कों को ही बनाने की प्रथा चल पड़ी है। जानकार बताते हैं कि भिवंडी मनपा देश की ऐसी इकलौती मनपा है जहां का प्रभारी शहर अभियंता मेकेनिकल इंजीनियरिंग से डिप्लोमाधारी है। जबकि यह पद केवल और केवल डिग्री धारी सिविल इंजिनियर के लिए आरक्षित होता है। इस तरह तमाम तरह की बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर कुख्यात मनपा का कामकाज वर्षों से प्रभारी अधिकारियों के भरोसे ही चल रहा है।

कर्मचारियों की किल्लत के कारण जनहित के कार्यों पर पड़ रहा है विपरीत प्रभाव
राज्य सरकार के नगरविकास विभाग द्वारा भिवंडी मनपा के लिए सक्षम अधिकारियों की नियुक्ति न करने से मनपा प्रशासन पूरी तरह लकवा ग्रस्त होकर लुंज-पुंज हो गया है। इतना ही नहीं मनपा के अधिकतर बड़े अधिकारियों के पास अन्य विभागों का भी अतिरिक्त प्रभार होने के कारण जनहित सहित शहर के तमाम विकास कार्य ठप्प पड़े हैं। जिसका विपरीत प्रभाव कोरोना संकट काल के दौरान भी पड़ा है। क्योंकि अनेक महत्वपूर्ण विभागों के शीर्ष अथवा सक्षम अधिकारी न होने से क्लर्कों को ही प्रभारी अधिकारी का चार्ज देकर उनके सहारे काम-काज चलाया जा रहा है। जिसका सीधा दुष्प्रभाव भिवंडी मनपा के प्रशासनिक कामकाज पर स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है।
कोरोना नियंत्रण सहित सहित भर्ती प्रक्रिया का भी प्रयास
भिवंडी मनपा आयुक्त डा. पंकज आशिया के मुताबिक़ कोरोना से शहर को उबारना मेरी पहली प्राथमिकता है। फिर भी इस बाबत नगरविकास विभाग से बात कर रिक्त पदों की भर्ती का प्रयास किया जा रहा है। ताकि मनपा प्रशासन का काम-काज चुस्त-दुरुस्त होने के साथ-साथ शहर विकास की गति भी पटरी पर आ सके।